यूपीआई से जरिये लेन-देन जून में रिकॉर्ड स्तर से नीचे 28.9 लाख करोड़ रुपये पर

यूपीआई से जरिये लेन-देन जून में रिकॉर्ड स्तर से नीचे 28.9 लाख करोड़ रुपये पर

यूपीआई से जरिये लेन-देन जून में रिकॉर्ड स्तर से नीचे 28.9 लाख करोड़ रुपये पर
Modified Date: July 1, 2026 / 05:09 pm IST
Published Date: July 1, 2026 5:09 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) लोकप्रिय भुगतान मंच यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिये जून में लेन-देन मासिक आधार पर रिकॉर्ड स्तर से घटकर 28.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले महीने यह रिकॉर्ड 29.9 लाख करोड़ रुपये था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून में यूपीआई के जरिये लेन-देन की संख्या 22.72 अरब दर्ज की गई, जो इससे पिछले महीने 23.2 अरब थी।

बीते महीने लेन-देन का मूल्य सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 28.9 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह 24.03 लाख करोड़ रुपये था।

यूपीआई लेन-देन की संख्या जून, 2025 में 18.3 अरब दर्ज की गई थी।

कैशफ्री पेमेंट्स के संस्थापक रीजू दत्ता ने कहा, ‘‘हालांकि, जून में यूपीआई मात्रा मासिक आधार पर कम हुई है, लेकिन महीने में 75.7 करोड़ लेन-देन का दैनिक औसत यूपीआई पेश किये जाने के बाद से अब तक का सबसे अधिक है। ये दैनिक औसत एक बहुत ही दिलचस्प कहानी बताता है कि कैसे यूपीआई कम मूल्य वाले लेन-देन के लिए भुगतान एक लोकप्रिय तरीका बन गया है।’’

स्पाइस मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) दिलीप मोदी के अनुसार, जून के यूपीआई आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि न केवल लेन-देन 22.7 अरब से अधिक हुए, बल्कि वे उस तेजी को भी बताते हैं जिस गति से पिछले एक साल में भारत का डिजिटल भुगतान परिवेश बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ 12 महीनों में, यूपीआई मात्रा में 4.3 अरब से अधिक लेन-देन और मूल्य में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह पूरे देश में डिजिटल भुगतान पर बढ़ते भरोसे और निर्भरता को बताता है।

यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में चालू है। इससे भारत डिजिटल भुगतान में एक वैश्विक अगुवा के तौर पर स्थापित हुआ है।

इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने से बाहर से पैसे भेजने यानी धन प्रेषण को बढ़ावा मिलने के साथ वित्तीय समावेश को बढ़ावा मिल रहा है और वैश्विक वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है।

एनपीसीआई, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की एक पहल है। यह भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली को संचालित करने वाली एक प्रमुख संस्थान है। यह यूपीआई का संचालन करता है, जिसका उपयोग लोगों के बीच या खरीदारी करते समय दुकानदारों को वास्तविक समय पर भुगतान के लिए किया जाता है।

भाषा रमण अजय

अजय


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