नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने मंगलवार को कहा कि देश में डिजिटल भुगतान के विस्तार की बहुत अधिक गुंजाइश हैं। उन्होंने कहा कि यूपीआई में अपने मौजूदा 40 करोड़ के आधार से दोगुने से अधिक होकर 100 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने की क्षमता है।
दुनिया के कुल खुदरा भुगतान लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में होता है, लेकिन इसके बावजूद प्रति व्यक्ति डिजिटल लेनदेन की संख्या के मामले में भारत को अभी कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की बराबरी करनी है।
केन्या का उदाहरण देते हुए आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा कि केन्या में प्रति व्यक्ति डिजिटल लेनदेन भारत की तुलना में लगभग दोगुना है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई), जो आरबीआई द्वारा प्रवर्तित संस्था है और जिसने यूपीआई बनाया है, उसने 2016 में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए मुख्य मंच पेश करने के कुछ ही महीनों के भीतर फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए यूएसएसडी आधारित सेवा शुरू की थी।
शंकर ने यहां ‘ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट’ में कहा, ”यूपीआई के सक्रिय उपयोगकर्ता लगभग 40 करोड़ हैं। हम 100 करोड़ उपयोगकर्ताओं का लक्ष्य रख रहे हैं। इसलिए अभी बहुत गुंजाइश है और हमें एक लंबी दूरी तय करनी है।”
उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के विस्तार ने देश का परिदृश्य बदल दिया है और वित्तीय समावेश लाने में मदद की है। एक उदाहरण देते हुए डिप्टी गवर्नर ने कहा कि घर बैठी एक गृहिणी भी यूपीआई की मदद से एक छोटा उद्यम चला सकती है क्योंकि उनके भुगतान वाला हिस्सा सुरक्षित है।
एक अध्ययन का हवाला देते हुए शंकर ने कहा कि डिजिटल भुगतान में 10 प्रतिशत की वृद्धि से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने साइबर सुरक्षा बढ़ाने के बारे में कहा कि रिजर्व बैंक ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिसमें डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए ‘म्यूल हंटर’ भी शामिल है।
भाषा पाण्डेय रमण
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