उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आठ साल में दोगुनी से अधिक हुई: आर्थिक समीक्षा

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आठ साल में दोगुनी से अधिक हुई: आर्थिक समीक्षा

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आठ साल में दोगुनी से अधिक हुई: आर्थिक समीक्षा
Modified Date: February 9, 2026 / 07:15 pm IST
Published Date: February 9, 2026 7:15 pm IST

लखनऊ, नौ फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पिछले आठ वर्षों में दोगुनी से अधिक बढ़कर 30.25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। सोमवार को राज्य विधानसभा में पेश किए गए प्रदेश के पहले आर्थिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। वर्ष 2016-17 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 13.30 लाख करोड़ रुपये था।

विधानसभा में वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

बजट सत्र के पहले दिन खन्ना ने उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य का योगदान 2016-17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 9.1 प्रतिशत हो गया है।

इसे एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए खन्ना ने कहा कि यह पहली बार है जब केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण विधानसभा में पेश किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘आर्थिक सर्वेक्षण केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह राज्य की प्रगति, लोगों की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाने वाला जीवंत दस्तावेज है।’

खन्ना ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और प्रौद्योगिकी नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। पिछली सरकारों का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस राज्य में कभी निवेशक आने से बचते थे, वहां अब 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की कमान संभाली थी और 2022 के विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में लौटे।

प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को साझा करते हुए खन्ना ने बताया कि यह 2016-17 के 54,564 रुपये से दोगुनी होकर 2024-25 में 1,09,844 रुपये हो गई है। वर्ष 2025-26 के लिए इसके 1.20 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, जीएसडीपी प्रति व्यक्ति आधार पर आय 2016-17 के 61,142 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,26,304 रुपये हो गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2024-25 में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि और संबद्ध सेवाओं का योगदान 25.8 प्रतिशत रहा। उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र का योगदान 47 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वित्त मंत्री ने कहा कि आजादी के समय राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के बराबर थी, लेकिन 2014-15 तक यह गिरकर राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2 प्रतिशत रह गई थी। 2024-25 में यह अनुपात सुधरकर 53.5 प्रतिशत हो गया है, जो गिरावट के रुझान के पलटने का संकेत है।

राजकोषीय संकेतकों और क्षेत्रीय प्रदर्शन का विवरण देते हुए मंत्री ने कृषि, उद्योग, युवा कौशल विकास, शिक्षा, महिला सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं के आंकड़े पेश किए।

उन्होंने बताया कि ‘व्हीबॉक्स’ की ‘इंडिया स्किल रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, उत्तर प्रदेश ‘न्यूमेरिकल स्किल्स’ (अंक कौशल) में 80.12 प्रतिशत के साथ देश में पहले स्थान पर है।

खन्ना ने कहा कि कृषि, उद्योग और सेवाओं में संतुलित विकास ने राज्य की अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार दिया है।

मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस रिपोर्ट की आलोचना की है। सपा के वरिष्ठ सदस्य संग्राम यादव ने सदन में कहा कि सरकार ने कार्य मंत्रणा समिति को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बारे में जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट राज्यपाल के अभिभाषण की ‘दूसरी प्रति’ मात्र है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की।

जवाब में खन्ना ने कहा कि मंत्रियों को जब भी आवश्यक हो सरकार का पक्ष रखने की पूरी स्वतंत्रता है।

भाषा आनन्द सुमित पाण्डेय

पाण्डेय


लेखक के बारे में