कमजोर मानसून से आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर पड़ सकता है दबावः आरबीआई बुलेटिन
कमजोर मानसून से आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर पड़ सकता है दबावः आरबीआई बुलेटिन
मुंबई, 22 जून (भाषा) दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने से घरेलू आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर दबाव पड़ सकता है जबकि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अब भी नाजुक बना हुआ है। सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मासिक बुलेटिन में यह बात कही गई।
जून माह के बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक से प्रकाशित लेख में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में अंतरिम शांति समझौता होने के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़े गतिरोध कायम हैं।
लेख कहता है कि अमेरिका एवं ईरान के बीच अस्थायी समझौते से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अब भी कमजोर बना हुआ है।
बुलेटिन में प्रकाशित लेख में कहा गया, ‘‘अगर यह समझौता टूटता है तो महंगाई के अनुमानों में उछाल, ऊर्जा आपूर्ति ढांचे में बाधा, निवेश में देरी, खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं और वित्तीय स्थिरता पर असर जैसे जोखिम फिर से बढ़ सकते हैं, जिससे वृद्धि दर पर भी दबाव आ सकता है।’’
इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसे निजी खपत और स्थायी निवेश से समर्थन मिला।
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों के उच्च-आवृत्ति संकेतक आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत देते हैं।
हालांकि, मई में कुछ तेजी के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति नियंत्रित दायरे में बनी हुई है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के चलते भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत बना हुआ है।
बुलेटिन में कहा गया कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी आधार के साथ इस दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे झटकों को सहने की क्षमता बनी हुई है।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के निजी मत हैं और ये आरबीआई के आधिकारिक विचार नहीं हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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