भारत में गेहूं की पैदावार चुनौतियों के बावजूद मजबूत: कृषि मंत्रालय

भारत में गेहूं की पैदावार चुनौतियों के बावजूद मजबूत: कृषि मंत्रालय

भारत में गेहूं की पैदावार चुनौतियों के बावजूद मजबूत: कृषि मंत्रालय
Modified Date: April 26, 2026 / 03:35 pm IST
Published Date: April 26, 2026 3:35 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) फसल वर्ष 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन स्थानीय स्तर पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बावजूद स्थिर और मजबूत बना हुआ है। कृषि मंत्रालय ने रविवार को यह बात कही। हालांकि एक उद्योग संगठन ने सरकार के पहले के अनुमान से कम उत्पादन का आकलन किया था।

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएफआई) ने 24 अप्रैल को अनुमान लगाया था कि 2025-26 (जुलाई-जून) फसल वर्ष में गेहूं उत्पादन 11.06 करोड़ टन रहेगा। यह 2024-25 के 10.96 करोड़ टन से थोड़ा अधिक है। इस अनुमान में हालिया मौसमी नुकसान को भी शामिल किया गया है। यह अनुमान सरकार के पहले के 12.02 करोड़ टन के अनुमान से काफी कम है।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने दोनों अनुमानों के बीच संतुलन की बात कही। उन्होंने कहा, “जहां संगठन ने 11 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है, वहीं कृषि मंत्रालय का पूर्व अनुमान 12 करोड़ टन था। वास्तविक उत्पादन इन दोनों के बीच कहीं होगा।”

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान गेहूं मौसम मिश्रित लेकिन मजबूत रहा है, जो जलवायु चुनौतियों और किसानों द्वारा अपनाए गए बेहतर उपायों का परिणाम है।

इस मौसम में गेहूं की बुवाई लगभग 3.34 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है और कीट या रोग का कोई बड़ा प्रकोप नहीं देखा गया है। समय पर बुवाई होने से क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है। हालांकि फरवरी में असामान्य रूप से अधिक तापमान के कारण फसल पर गर्मी का दबाव पड़ा, जिससे दाने बनने की अवधि कम हुई और पैदावार पर असर पड़ा। कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भी कुछ क्षेत्रों में गुणवत्ता और उत्पादन को नुकसान पहुंचाया।

मंत्रालय ने कहा कि कुछ कारक इन नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। इस साल छह लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बुवाई हुई है, जिससे नुकसान की आंशिक भरपाई होने की संभावना है। समय पर बुवाई से फसल को गर्मी के दबाव से बचाने में मदद मिली है।

उच्च गुणवत्ता वाले और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के उपयोग में वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन क्षमता बेहतर हुई है। फसल के दौरान खरपतवार का प्रभाव भी कम रहा है।

हरियाणा में गेहूं की आवक सरकार के 75 लाख टन के खरीद लक्ष्य से अधिक हो चुकी है और 56.13 लाख टन की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष से लगभग नौ लाख टन अधिक है। मध्य प्रदेश ने बेहतर उत्पादन को देखते हुए अपना खरीद लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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