खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़ने से जून में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर
खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़ने से जून में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) खाद्य व गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से जून में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई। मई में यह 9.68 प्रतिशत के स्तर पर थी।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) की गणना के लिए आधार वर्ष 2022-23 है।
खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 5.49 प्रतिशत हो गई जो मई में 3.60 प्रतिशत थी। गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई 11.07 प्रतिशत रही जबकि खनिज श्रेणी में यह 9.45 प्रतिशत दर्ज की गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि थोक मुद्रास्फीति के जून, 2026 के आंकड़े पर खनिज तेल (जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं), खाद्य वस्तुएं, विनिर्मित मूल धातु तथा विनिर्मित रसायन एवं रासायनिक उत्पादों की कीमतों का असर दिखा।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन एवं बिजली श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति जून में 27.41 प्रतिशत रही, जबकि मई में यह 30.33 प्रतिशत थी।
विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति मई की तरह जून में भी 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही।
बार्कलेज ने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद जून में वैश्विक स्तर पर जिंस और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। इसका असर ईंधन एवं बिजली श्रेणी की थोक महंगाई में कमी के रूप में दिखाई दिया।
बार्कलेज ने कहा, ‘‘ हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ने से युद्धविराम समझौता एक बार फिर खतरे में पड़ गया है। ऐसे में हम थोक महंगाई और उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के आगामी आंकड़ों पर करीबी नजर रखे हुए हैं। हमारा मानना है कि मुद्रास्फीति के ये आंकड़े अब अपने उच्चतम स्तर के करीब हैं और आने वाले कुछ महीनों में इनमें नरमी आने की उम्मीद है।’’
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जून में कुल थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि की मुख्य वजह प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही, जिसने ईंधन श्रेणी की मुद्रास्फीति में आई नरमी के असर को बेअसर कर दिया।
बोफा ग्लोबल रिसर्च में भारत और आसियान आर्थिक अनुसंधान के प्रमुख राहुल बजोरिया ने कहा कि 2026 की तीसरी तिमाही में थोक मुद्रास्फीति के नरम पड़ने के आसार हैं।
खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति भी जून में बढ़कर 17 महीने के उच्चस्तर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जबकि इससे पिछले महीने यह 3.93 प्रतिशत थी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है। सरकार ने दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ कुल मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर बनाए रखने का दायित्व सौंपा है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को पिछले महीने 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। इसके लिए वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर खुदरा पेट्रोल और डीजल कीमतों पर पड़ने से लागत बढ़ना मुख्य वजह बताई गई थी।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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