विश्व बैंक ने भारत में अगले पांच साल में सालाना आठ से 10 अरब डॉलर वित्तपोषण की जतायी प्रतिबद्धता

विश्व बैंक ने भारत में अगले पांच साल में सालाना आठ से 10 अरब डॉलर वित्तपोषण की जतायी प्रतिबद्धता

विश्व बैंक ने भारत में अगले पांच साल में सालाना आठ से 10 अरब डॉलर वित्तपोषण की जतायी प्रतिबद्धता
Modified Date: January 30, 2026 / 07:31 pm IST
Published Date: January 30, 2026 7:31 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) विश्व बैंक समूह और भारत ने शुक्रवार को एक नए ‘कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क’ (सीपीएफ) की घोषणा की। इसके तहत अगले पांच साल में सालाना आठ से 10 अरब अमेरिकी डॉलर का वित्तपोषण किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत की वृद्धि के अगले चरण को गति देना और एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के उसके दृष्टिकोण को साकार करना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने विश्व बैंक समूह के साथ इस नए सीपीएफ का स्वागत किया, जो भारत के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा के नेतृत्व में आए दल से मुलाकात के बाद कहा कि सीपीएफ का उद्देश्य सार्वजनिक कोष को निजी पूंजी के साथ मिलाकर, ग्रामीण और शहरी भारत में अधिक रोजगार सृजित करना और विश्व बैंक समूह के वैश्विक ज्ञान से परियोजनाओं को समृद्ध बनाना है।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि दोनों ने भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण ‘विकसित भारत’ के समर्थन में भारत-विश्व बैंक सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा, “सार्वजनिक कोष को निजी पूंजी के साथ मिलाकर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिक रोजगार सृजित करना और बैंक समूह के वैश्विक ज्ञान से परियोजनाओं को समृद्ध बनाना गति और पैमाना दोनों स्तरों पर सतत प्रभाव सुनिश्चित करेगा।”

वित्त मंत्री ने विकास साझेदारी के महत्व पर जोर दिया जो वित्तपोषण से परे जाकर ज्ञान साझा करने, तकनीकी सहायता और वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों के आदान-प्रदान को भी शामिल करती है।

विश्व बैंक ने बयान में कहा कि भारत-विश्व बैंक समूह के बीच नई रणनीतिक साझेदारी देश में इस वैश्विक रोजगार रणनीति को लागू करती है और अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष आठ से 10 अरब अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण के साथ इसका समर्थन करती है, ताकि रोजगार सृजित किया जा सके और बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र की पूंजी जुटाई जा सके।

इसमें कहा गया है कि इस नई साझेदारी के केंद्र में निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन है। भारत के श्रम बाजार में प्रति वर्ष लगभग 1.2 करोड़ युवा प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए रोजगार से समृद्ध क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देना देश की वृद्धि के अगले चरण के लिए प्राथमिकता है।

विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा ने कहा, “भारत आज वैश्विक वृद्धि के प्रमुख इंजन में से एक है। हमारी रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के रास्ते पर भारत को और भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद करना है।”

उन्होंने कहा, “अधिक रोजगार सृजन करना हमारे काम का मूल है। यह साझेदारी वित्तपोषण, सुधारों और निजी क्षेत्र के निवेश को एक साथ लाती है ताकि वृद्धि को लाखों भारतीयों के लिए अवसरों में बदला जा सके।”

विश्व बैंक समूह ने बताया कि यह नई रणनीतिक साझेदारी भारत और विश्व बैंक समूह के बीच एक वर्ष के सहयोग का परिणाम है।

साझेदारी में विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को हुनरमंद बनाने, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए बाधाओं को कम करने और अवसरों का विस्तार करने के माध्यम से निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है।

भाषा रमण अजय

अजय


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