Reported By: Jitendra Thawait
,Guru-Ghasidas-Central-University, image source: ibc24
Bilaspur News: बिलासपुर का गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय लगातार अपनी अव्यवस्थाओं के कारण इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। (Guru Ghasidas Central University controversy) विश्विद्यालय में लगातार कोई ना कोई घटनाक्रम हो जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय प्रबंधन पर सवालिया निशान लगना लाजिमी ही है। अब गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में छात्रों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे ताजातरीन मामला तात्या भील बॉयज हॉस्टल के मेस में नाश्ता लेने गए बीटेक छात्र हर्ष अग्रवाल पर रसोइए के द्वारा चाकू से हमले की कोशिश का है। इसमें रसोईए का चाकू लेकर छात्र को दौड़ाते CCTV फूटेज सामने आया है। बताया जा रहा है कि, समय समाप्त होने के बाद नाश्ता मांगने को लेकर छात्र और मेस कर्मियों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। (Guru Ghasidas Central University controversy) आरोप है कि, मेस में काम करने वाले दीपेंद्र और दीपक केवट ने छात्र के साथ मारपीट की और चाकू लेकर उसे दौड़ाने लगे।
इस घटना का सीसीटीवी फूटेज भी सामने आया है। घटना के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने कोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय परिसर में हुई इस घटना ने छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। (Guru Ghasidas Central University controversy) वहीं मेस में खराब खाना मिलने की घटना ने भी तूल पकड़ लिया था और आक्रोशित छात्रों ने जमकर प्रदर्शन भी किया है।
इससे पहले विश्विद्यालय में एक परिसंवाद कार्यक्रम में साहित्यकार मनोज रूपड़ा का अपमान राष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सिटी की धूमिल छवि को सामने लाई है। (Guru Ghasidas Central University controversy) इस घटना की न केवल चौतरफा आलोचना हुई बल्कि साहित्य जगत ने भी घटना के विरोध में मोर्चा खोल दिया। सियासी तौर पर भी घटना का विरोध शुरू हो गया है। कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल अध्यक्षीय उद्बोधन देते-देते विषयांतर हो गए और उन्होंने वहां मौजूद महाराष्ट्र नागपुर से आए साहित्यकार, कथाकार मनोज रूपड़ा से पूछ लिया, उन्हें कैसा लग रहा है। साहित्यकार रूपड़ा ने उनसे कहा कि, आप इधर-उधर की जगह विषय पर बात करिए। इतना सुनते ही कुलपति आलोक चक्रवाल भड़क गए और उन्होंने आपा खोते हुए साहित्यकार को न केवल जलील किया बल्कि कार्यक्रम से बाहर निकालने भी कह दिया। घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया और यूनिवर्सिटी की छवि गिर गई।
ऐसा पहली बार नहीं है जब सेंट्रल यूनिवर्सिटी और कुलपति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा है। (Guru Ghasidas Central University controversy) यूनिवर्सिटी में नमाज विवाद, छात्र अर्सलान और छात्रा की मौत के साथ छात्रों को रस्टिकेट करने व अन्य विश्वविद्यालयीन गतिविधियों को लेकर कुलपति पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। वहीं यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस मामले में यूनिवर्सिटी की भूमिका को सकारात्मक बता रहा है।
प्रबंधन का कहना है कि पहले यूनिवर्सिटी का स्ट्रैंथ बहुत कम था और अब कई हजार छात्र बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर में यहां रह रहे हैं, लिहाजा कुछ घटनाएं हो जाना स्वाभाविक है। छात्रों को अनुशासन बनाए रखना चाहिए। प्रवंधन समय समय पर एक्शन भी लेता है और जो कानूनी मामला है उसे पुलिस देखती है। वहीं शिकायतकर्ता छात्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से सिर्फ आश्वासन मिलता है,ठोस कार्रवाई नहीं होती । शिकायत करने वाले बताते हैं कि प्रवंधन अपनी गलती कभी नहीं स्वीकारता और कई बार छात्रों को मैन्युपुलेट भी किया जाता है।
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