Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case: छत्तीसगढ़ में ‘मौत की फर्जी कहानी’.. ठगे जा चुके थे 70 लाख रुपये, जानें ‘सर्पदंश’ के दावे को कैसे बनाया फर्जीवाड़े का हथियार
Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case: छत्तीसगढ़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। 17 फर्जी प्रकरणों में FIR दर्ज कर ली गई है।
Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case/Photo Credit: AI
- बिलासपुर के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में सभी 17 फर्जी मामलों में FIR दर्ज
- करीब 70 लाख रुपये की मुआवजा राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निकाली गई
- जांच में डॉक्टरों, वकीलों और परिजनों की मिलीभगत के आरोप सामने आए
बिलासपुर। Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। बिलासपुर जिले में सामने आए सभी 17 फर्जी प्रकरणों में अब FIR दर्ज कर ली गई है। आपको बता दें कि इससे पहले तखतपुर, सरकंडा और तोरवा थाने में एक-एक मामला दर्ज हुआ था, जबकि अब नए 14 मामलों में भी केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई के बीच आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
फर्जी दस्तावेज से लिया गया था मुआवजा
Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case मिली जानकारी के अनुसार, करीब 70 लाख रुपए के इस घोटाले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सर्पदंश से मौत दिखाकर मुआवजा लिया गया था। प्रशासन इस पूरे मामले में कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ था। जांच के बाद अब 17 फर्जी प्रकरणों में FIR दर्ज कर ली गई है। नए मामलों में सरकंडा में 5, कोनी में 3, सिविल लाइन में 3, तोरवा में 2 और सिटी कोतवाली थाने में 1 अपराध दर्ज किया गया है।
डॉक्टरों, वकीलों और परिजनों की थी मिलीभगत
Bilaspur Snake Bite Death Fraud Caseजांच में सामने आया कि कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण बीमारी या कुछ और था। कई मामलों में पूरे दस्तावेज फर्जी थे। कुछ में दस्तावेज में काट छांट की गई तो वहीं कुछ मामलों में तो मृतक के परिजनों को ये पता तक नहीं है… कि उनके नाम पर सर्पदंश मुआवजा राशि का आवंटन करा लिया गया है। आरोप है कि इस पूरे खेल में आवेदकों के साथ डॉक्टरों, वकीलों और परिजनों की मिलीभगत थी। जिससे सरकारी राशि का गबन किया गया। कई आरोपियों और संदेहियों से पूछताछ भी जारी है।
MLA सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
Bilaspur Snake Bite Death Fraud Case इस घोटाले का मामला सबसे पहले बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था। विधानसभा में यह तथ्य सामने आया था कि छत्तीसगढ़ के नागलोक कहे जाने वाले जशपुर से भी ज्यादा स्नेक बाइट से मौत के मामले बिलासपुर जिले में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और एक-एक कर फर्जी दावों का खुलासा होता गया। हालांकि उनका दावा है कि ये मामले नाकाफी है… सघन जांच करने पर 100 से ज़्यादा फर्जी मामले जरूर निकलेंगे। 70 लाख रुपए से भी ज्यादा के इस बहुचर्चित घोटाले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बीच आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
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