Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests || Image- IBC24 News File
बिलासपुर : Bilaspur High Court Landmark Judgment : बिलासपुर हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा और उनके आत्मसम्मान को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, भारतीय समाज में यदि किसी महिला के साथ दुष्कर्म जैसा घिनौना कृत्य होता है, तो वह अपनी गरिमा और आत्मसम्मान पूरी तरह खो देती है। समाज का सामना करने में होने वाली अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना और ग्लानि ही उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए काफी है। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही पहले जिला रायपुर अब बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में हुए एक संवेदनशील मामले में आरोपी की 10 वर्ष की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच ने मामले से जुड़ी दस्तावेजी फाइल के तहत आरोपी विजय कुमार वर्मा द्वारा दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है।
Balodabazar Crime News जानकारी के अनुसार घटना 22 अगस्त 2004 की है। पीड़िता उस दिन घर में अकेली थी, उसका भाई और भाभी खेती किसााने के काम के लिए खेत गए हुए थे। इसी का फायदा उठाकर आरोपी विजय कुमार सूने घर में जबरन घुस गया और दरवाजा अंदर से बंद कर पीड़िता के साथ अनाचार किया। तभी अचानक उसका भाई खेत से वापस लौटा। दरवाजा खटखटाने पर पीड़िता ने रोते हुए अंदर से आवाज लगाई, जब दरवाजा खुला, तो आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे भाई ने पकड़कर डंडे से पिटाई की। घटना से सहमी और लोक-लाज से आहत पीड़िता ने घर में रखे मिट्टी का तेल अपने ऊपर उड़ेलकर खुद को आग के हवाले कर दिया।
Justice NK Vyas Rape Case Verdict जलने के तुरंत बाद पीड़िता ने अपनी भाभी को बताया था कि आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया, इसलिए उसने आत्मदाह किया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया, मामले की सुनवाई प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार के कोर्ट में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दुष्कर्म और आत्महत्या के दुष्प्रेरणा के आरोपी विजय कुमार को तीन अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने धारा 376(1) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 3000 रुपये अर्थदंड दिया।
कोर्ट ने साक्ष्यों का बारिकी से अध्ययन करने के बाद प्रेम प्रसंग की थ्योरी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, घटनास्थल से मृतका का जो सलवार और कपड़ा मिला था, वह फटा हुआ था। यदि यह आपसी सहमति का मामला होता, तो कपड़े फटे हुए नहीं मिलते। यह दर्शाता है कि पीड़िता ने खुद को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। । कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, आरोपी का कृत्य ही पीड़िता की आत्महत्या का सीधा कारण था। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा, ऐसे जघन्य मामलों में किसी भी प्रकार की उदारता नहीं दिखाई जा सकती। हाई कोर्ट ने आरोपी की जमानत और मुचलके को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए दो महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
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