शह मात The Big Debate: उधर दिल्ली में सम्मान.. इधर ‘आदिवासी’ पर घमासान! बस्तरियों के मुद्दों पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस के नेता, आखिर कौन है उनके असली हितैषी

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उधर दिल्ली में सम्मान.. इधर 'आदिवासी' पर घमासान! BJP and Congress leaders face off on Bastar issues

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 11:48 PM IST,
    Updated On - August 1, 2026 / 12:02 AM IST

रायपुरः Chhattisgarh News नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही केंद्र-राज्य की बीजेपी सरकार का पूरा जोर अब बस्तर के चहुंमुखी और तेज विकास पर है, जिसके लिए मूल जरूरतों और भविष्य की प्लानिंग पर साय सरकार आगे बढ़ रही है। अपने दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में छत्तीसगढ़ और बस्तर विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे रखे, जिसमें राजनांदगांव में गैस आधारित यूरिया प्लांट की मंजूरी, प्रदेश के 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने, रायपुर या बस्तर में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की मांग जैसे विषय शामिल रहे। CM साय ने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार के ‘बस्तर विजन’ की भी जानकारी दी।

Chhattisgarh News इसके अलावा मुख्यमंत्री की केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात हुई, जिसमें बस्तर के दुर्गम इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मानकों में छूट पर सहमति बनी, प्रदेश में 2305 नए मोबाइल टावरों की मंजूरी और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद के समाधान पर भी बातचीत हुई। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कटघोरा-डोंगरगढ़ और बस्तर के लिए दो रेल लाइन पर जल्द काम शुरू करने का भरोसा दिया।

हालांकि, सरकार की इस पूरी कवायद को विपक्ष केवल फोटो अपोर्चुनिटी करार दे रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि दिल्ली में राष्ट्रपति जी के साथ फोटो खिंचवाने मात्र से आदिवासियों का पेट नहीं भरेगा। उन्हें नौकरी और रोजगार देना पड़ेगा। साथ ही कांग्रेस ने बस्तर पंडुम को अपना आयोजन बताते हुए बीजेपी पर क्रेडिट लेने का आरोप लगाया। जवाब में बीजेपी ने तंज कसा कि जिनके शासनकाल में आदिवासी क्षेत्रों का बुरा हाल रहा, विकास से कोसों दूर रहे, वो आज सियासी आरोप लगा रहे हैं।

एक तरफ सरकार विजन 2047 और मिशन बस्तर विकास पर फोकस कर रही है तो कांग्रेस का आरोप है कि आदिवासियों के एक दल को दिल्ली विजिट कराने जैसे प्रतीकात्मक आयोजनों से विकास नहीं होगा, बल्कि रोजगार, जल-जंगल-जमीन और बुनियादी सुविधाओं पर ठोस कदम उठाने होंगे। सवाल ये कि आखिर जमीन आदिवासियों का विश्वास जीतने उनके साथ कौन खड़ा है।

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