छत्तीसगढ़: भाजपा सरकार के मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई ढालदास कांग्रेस में शामिल

छत्तीसगढ़: भाजपा सरकार के मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई ढालदास कांग्रेस में शामिल

छत्तीसगढ़: भाजपा सरकार के मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई ढालदास कांग्रेस में शामिल
Modified Date: September 12, 2026 / 03:52 pm IST
Published Date: September 12, 2026 3:52 pm IST

रायपुर, 12 सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल हो गए।

ढालदास ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें टिकट देती है, तो वह अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

सतनामी पंथ के गुरु बालदास साहेब के सबसे बड़े बेटे ढालदास शुक्रवार को रायपुर में एक स्थानीय कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए।

बघेल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ढालदास का पार्टी में स्वागत किया।

उन्होंने लिखा, ‘‘आदरणीय गुरु ढाल दास जी का हम सब कांग्रेस पार्टी में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं।’’

बघेल ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘शुरुआत हुई है..सब मिलकर भाजपा को हटाएंगे।’’

ढालदास साहेब ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा कि उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा कि मौजूदा सरकार के तहत जरूरतमंद लोगों को वह शांति, विकास, कल्याण और न्याय नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को शांति, सुरक्षा, विकास और बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। गरीबों का कल्याण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मैंने इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।’’

ढालदास ने कहा कि वह सतनाम पंथ के संस्थापक बाबा गुरु घासीदास के वंशज हैं।

उन्होंने बताया कि उनके धार्मिक गुरु गुरु बालकदास साहेब थे, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान ‘राजा’ की उपाधि दी गई थी।

गुरु बालकदास (1805-1860) बाबा गुरु घासीदास के पुत्र और एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक नेता थे।

ढालदास ने कहा कि उन्होंने ‘‘राजा और गुरु, दोनों की जिम्मेदारियां निभाई हैं’’ और अब लोगों के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपने छोटे भाइयों को नेतृत्व करने का मौका दिया, लेकिन उनके नेतृत्व में काम अधूरा रह गया। मुझे लगा कि अब मुझे जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। लोगों की देखभाल करना और उनके कल्याण के लिए काम करना एक राजा और गुरु का कर्तव्य है।’’

ढालदास ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास की शिक्षाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाना चाहिए।

गुरु घासीदास की शिक्षाओं में ‘‘मनखे-मनखे एक समान’’ का संदेश प्रमुख है।

उन्होंने कहा कि दूसरों की सेवा करना, शांति फैलाना और लोगों की भलाई के लिए काम करना कांग्रेस में शामिल होने की एक वजह है।

ढालदास ने बताया कि उनके तीन भाई और एक बहन हैं।

उनकी बहन तिल्दा-नेवरा नगरपालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं, जबकि उनके छोटे भाई गुरु खुशवंत साहेब भाजपा सरकार में मंत्री हैं और एक अन्य भाई गुरु सौरभ साहेब रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद परिवार में राजनीतिक मतभेद की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘परिवार में कोई मतभेद नहीं है। हमने पहले ही सब कुछ चर्चा कर ली थी। वे अपना नेतृत्व संभालेंगे और मैं अपना।’’

ढालदास ने अगला विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा, ‘‘अगर मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, तो लोगों की सेवा कैसे करूंगा? अगर पार्टी मुझे मौका देती है, तो मैं जरूर चुनाव लड़ूंगा।’’

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मुंगेली विधानसभा सीट उनकी पहली पसंद है हालांकि, वह आरंग से भी चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व वर्तमान में उनके भाई गुरु खुशवंत साहेब करते हैं।

खुशवंत साहेब विष्णु देव साय सरकार में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री हैं।

ढालदास ने कहा कि अगर खुशवंत साहेब को आरंग से कांग्रेस का टिकट मिलता है, तो वह अपने भाई के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मेरे भाई को आरंग से टिकट मिलता है, तो मैं वहां से चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं मुंगेली से चुनाव लड़ूंगा।’’

ढालदास ने दावा किया कि खुशवंत साहेब के आरंग सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की संभावना मजबूत नहीं है और पार्टी उन्हें किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने के लिए कह सकती है।

उन्होंने हालांकि कहा कि वह पार्टी के फैसले का पालन करेंगे।

ढालदास ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ठीक से काम करने में नाकाम रही है और सतनामी समुदाय को वह विकास नहीं मिला है जिसका वह हकदार है।

उन्होंने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ में सतनामी समुदाय एक बड़ा वोट बैंक है। इस समुदाय और हमारे धार्मिक स्थलों का वैसा विकास नहीं हुआ है जैसा होना चाहिए था। लोगों को जो न्याय मिलना चाहिए, वह भी नहीं मिल रहा है।’’

छत्तीसगढ़ में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होगा।

भाषा संजीव जितेंद्र

जितेंद्र


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