छत्तीसगढ़ एनएएन घोटाला: दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों और पूर्व महाधिवक्ता के खिलाफ मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ एनएएन घोटाला: दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों और पूर्व महाधिवक्ता के खिलाफ मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ एनएएन घोटाला: दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों और पूर्व महाधिवक्ता के खिलाफ मामला दर्ज
Modified Date: April 19, 2025 / 06:06 pm IST
Published Date: April 19, 2025 6:06 pm IST

रायपुर, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छत्तीसगढ़ में नागरिक पूर्ति निगम (एनएएन) कथित घोटाले की जांच और मुकदमे को प्रभावित करने के लिए पदों के दुरुपयोग को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों और पूर्व महाधिवक्ता के खिलाफ दर्ज मामले की जांच का जिम्मा संभाल लिया है।

यह कथित घोटाला पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था।

पिछले वर्ष इस मामले में छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने दो पूर्व आईएएस अधिकारियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला तथा पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

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बाद में राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की थी।

शनिवार को एक आधिकारिक बयान में सीबीआई ने कहा कि ब्यूरो ने आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा में पहले से दर्ज मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने रायपुर में दो स्थानों पर दो आरोपी लोक सेवकों के परिसरों की तलाशी ली और कुछ दस्तावेज बरामद किए।

बयान में कहा गया है कि आरोपी लोक सेवकों ने कथित तौर पर राज्य के ईओडब्ल्यू/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा 2015 में उनके खिलाफ दर्ज नागरिक पूर्ति निगम (एनएएन) मामले और 2019 में एनएएन मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में जारी कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयकर विभाग द्वारा जब्त डिजिटल साक्ष्य के अनुसार, आरोपी लोक सेवकों ने दोनों मामलों में कार्यवाही को विफल करने के कई प्रयास किए।

सीबीआई ने कहा है कि आरोपी लोक सेवकों ने अनुचित तरीके से सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए प्रेरित करने तथा ईडी और ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा जांच किए जा रहे उपरोक्त मामलों में अग्रिम जमानत पाने के लिए एक अन्य आरोपी सतीश चंद्र वर्मा (तत्कालीन महाधिवक्ता, छत्तीसगढ़) को कथित तौर पर अनुचित लाभ दिया।

कथित घोटाला फरवरी, 2015 में उजागर हुआ था, जब एसीबी/ईओडब्ल्यू ने नागरिक आपूर्ति निगम (एनएएन) के 25 परिसरों पर एक साथ छापे मारे थे, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नोडल एजेंसी थी।

इस दौरान कुल 3.64 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई थी। छापे के दौरान एकत्र किए गए चावल और नमक के कई नमूनों की गुणवत्ता की जांच की गई और दावा किया गया कि वे घटिया और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त थे।

बाद में, एसीबी ने मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के दो अधिकारियों अनिल टुटेजा व आलोक शुक्ला और तत्कालीन राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में तैनात अधिकारियों समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया ।

टुटेजा और शुक्ला दोनों ने एनएएन में सेवा दी थी। पिछले वर्ष अप्रैल में, टुटेजा को छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। भाषा संजीव जोहेब

जोहेब


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