किसी के बहकावे में न आएं, अपनी सरकार पर भरोसा रखें: शाह ने बस्तर के स्थानीय लोगों से कहा
किसी के बहकावे में न आएं, अपनी सरकार पर भरोसा रखें: शाह ने बस्तर के स्थानीय लोगों से कहा
(तस्वीरों के साथ)
जगदलपुर, 19 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बस्तर के लोगों से कहा कि उन्हें माओवादी विचारधारा से जुड़े संगठनों की ओर से किए गए दावों से “गुमराह नहीं होना चाहिए।” उन्होंने बस्तर के लोगों से अपील की कि वे अपनी चुनी हुई सरकारों पर भरोसा करें, जो देश से नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद उनके विकास के लिए काम कर रही हैं।
केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक के बाद यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शाह ने कहा कि सुरक्षा बलों की वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण 31 मार्च की समय सीमा से पहले ही देश से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
शाह ने घोषणा की कि बस्तर संभाग, जो दशकों से देश में नक्सली हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है, उसे 2031 तक भारत के “सर्वश्रेष्ठ” आदिवासी क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में स्थित बस्तर संभाग क्षेत्रफल के मामले में केरल से भी बड़ा है और इसमें बस्तर सहित सात जिले शामिल हैं। जगदलपुर बस्तर जिले का मुख्यालय है।
शाह ने कहा, “मैं बस्तरवासियों को आगाह करना चाहता हूं कि माओवादी विचारधारा वाले लोग, जिन्होंने 50 वर्षों तक बंदूकों से बस्तर को तबाह किया, वे अपना नाम, रूप और बातें बदलकर आपको उकसाने आएंगे, लेकिन आपको उनके बहकावे में नहीं आना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “आपकी चुनी हुई सरकारें, चाहे वह पंचायत स्तर पर हो, राज्य स्तर पर हो या केंद्र स्तर पर, यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगी कि आपका विकास हो, क्योंकि मार्च 2026 के बाद भारत नक्सल मुक्त हो गया है।”
शाह ने कहा, “अब आपको डर में जीने की जरूरत नहीं है। विकास का सूर्योदय हो चुका है…।”
मंत्री ने कहा कि उनका विभाग और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार अगले पांच वर्षों में बस्तर के आदिवासियों और स्थानीय लोगों को “सक्षम, समृद्ध और कुशल” बनाने के लिए एक कार्य योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “हम उन क्षेत्रों में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विचार कर रहे हैं, जो नक्सलवाद से प्रभावित होने के दंश से मुक्त हो चुके हैं।”
शाह ने कहा कि माओवाद से प्रभावित सभी राज्यों के साथ एक “कार्य योजना” साझा की गई है।
उन्होंने कहा कि ‘‘नक्सल मुक्त भारत अभियान” में कुछ तारीखों का ऐतिहासिक महत्व है – 13 दिसंबर 2023, जब छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने शपथ ली, तब नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए दृढ़ अभियान शुरू हुआ।
शाह ने कहा कि दूसरी तारीख 24 अगस्त 2024 है, जब सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था।
मंत्री ने कहा, “तीसरी तारीख, जिसके बारे में आप सभी जानते हैं – 31 मार्च 2026 (देश से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र की ओर से निर्धारित समय सीमा)। सुरक्षा बलों के शौर्य, साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण, निर्धारित समय सीमा से पहले ही देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन हो चुका है।”
उन्होंने कहा कि वह बगैर संकोच के कहना चाहते हैं कि ढेर सारी गैर भाजपा सरकारों ने नक्सलवाद को खत्म करने में केंद्र सरकार का समर्थन किया है, लेकिन (छत्तीसगढ़ की) पिछली कांग्रेस सरकार ने नक्सल उन्मूलन अभियान में हमारा सहयोग नहीं किया।
शाह ने कहा, “दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के तुरंत बाद हमने बस्तर में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए फिर से कवायद की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब से नक्सलवाद नक्सलबाड़ी से फैलना शुरू हुआ, उसके पक्षधर लोग और बुद्धिजीवी यह बता रहे थे कि नक्सलवाद इसलिए अस्तित्व में आया कि कुछ क्षेत्र में विकास नहीं पहुंचा, जबकि यह वास्तविकता नहीं थी, विकास नहीं पहुंचने का कारण ही नक्सलवाद है। देश में कई सारे हिस्से ऐसे थे, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र से भी ज्यादा पिछड़े हुए थे, लेकिन वहां पर नक्सलवाद नहीं फैला।’’
शाह ने कहा कि वे क्षेत्र धीरे-धीरे आगे बढ़ गए, लेकिन हमारा बस्तर और कई सारे ऐसे क्षेत्र जो नक्सलवाद प्रभावित थे, जस के तस रहे।’’
उन्होंने कहा कि नक्सलियों के कारण पूरा क्षेत्र विकास से वंचित रहा है।
शाह ने कहा, “स्थानीय लोगों को न तो राशन कार्ड मिले, न ही मुफ्त अनाज योजना का लाभ और न ही पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा। रोजगार का नामोनिशान नहीं था।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति यह है कि 19 मई 2026 तक जो क्षेत्र कभी नक्सलवाद की गिरफ्त में थे, वहां अब विकास का एक नया स्वरूप आकार लेता हुआ दिखाई देगा।
गृह मंत्री ने क्षेत्र में शुरू किए जा रहे विकास कार्यक्रमों का भी विस्तृत विवरण दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने बस्तर संभाग को नक्सलवाद से मुक्त कराने के लिए वहां लगभग 200 सुरक्षा शिविर स्थापित किए थे। अब बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। हमने तय किया है कि प्रथम चरण में 200 शिविरों में से 70 को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा में तब्दील किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकार को गांवों में लोगों के घर तक ले जाना है। सरकारी सुविधाओं को बस्तर के हर आदिवासी भाई-बहन के घर तक ले जाना है।’’
वीर गुंडाधुर बस्तर के एक आदिवासी नेता थे, जिन्होंने 1910 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था।
शाह ने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र को विकास से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि यहां प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसीएस) स्थापित की जाएंगी और क्षेत्र में एक ग्राम डेयरी भी स्थापित की जाएगी।
मंत्री ने कहा, ‘‘यहां की महिलाएं अपने पशुओं का दूध डेयरी पहुंचा सकेंगी। हम बस्तर के हर आदिवासी नागरिक को एक गाय और एक भैंस देने वाले हैं, जिनके माध्यम से वे सहकारी तरीके से दूध पूरे भारत में विपणन कर पाएंगे। इसके लिए एनडीडीबी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने करार किया है। आने वाले छह महीने में हम बस्तर संभाग में डेरी का बड़ा नेटवर्क बनाने जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, “हमने ‘बस्तर पंडुम’ की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाएं बनाने के वास्ते विशेष प्रयास करने का आह्वान किया था।”
शाह ने कहा कि इस पहल के तहत आदिवासी संस्कृति के सभी आयामों, जिनमें नृत्य, गीत, भाषा, पहनावा, व्यंजन और हस्तशिल्प शामिल हैं, के लिए एक बहुत बड़ा मंच प्रदान किया गया है।
मंत्री ने कहा कि यहां पहले ही दो बस्तर ओलंपिक आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 3.94 लाख खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों में नक्सलियों का एक बहुत बड़ा दल भी शामिल था, जिसने पुनर्वास स्वीकार कर लिया था।
भाषा
प्रशांत पारुल
पारुल

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