Chhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi: छत्तीसगढ़ में अगले एक हफ्ते तक नहीं होगी बारिश! मौसम की बेरूखी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, जानिए क्या कहते हैं मौसम विभाग के वैज्ञानिक
Chhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi: छत्तीसगढ़ में अगले एक हफ्ते तक नहीं होगी बारिश! मौसम की बेरूखी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, जानिए क्या कहते हैं मौसम विभाग के वैज्ञानिक
Chhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi: छत्तीसगढ़ में अगले एक हफ्ते तक नहीं होगी बारिश! मौसम की बेरूखी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, जानिए क्या कहते हैं मौसम विभाग के वैज्ञानिक / Image: AI GeneratedChhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi: छत्तीसगढ़ में अगले एक हफ्ते तक नहीं होगी बारिश! मौसम की बेरूखी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, जानिए क्या कहते हैं मौसम विभाग के वैज्ञानिक / Image: AI Generated
- छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार धीमी
- किसानों की बढ़ी चिंता
- कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी जारी
रायपुर: Chhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi जून का महीना विदा होने को है और जुलाई शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकि रह गए हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी है। किसानों की चिंता की सबसे बड़ी वजह है कि बारिश का ना होना, बारिश नहीं होने के चलते किसान अभी तक बुआई का काम पूरा नहीं कर पाए हैं। वहीं, दूसरी ओर मौसम विभाग ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। मौसम विभाग की मानें तो मूसलाधार बारिश के लिए करीब 1 हफ्ते तक और इंतेजार करना होगा। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत हिस्सों में मानसून का आगमन हो चुका है।
अभी मूसलाधार बारिश नहीं
Chhattisgarh Me Barish Kab Tak Hogi मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश की राजधानी रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी सहित कई हिस्सों में बीते कुछ दिनों से हल्ही बारिश हो रही है, लेकिन इतनी बारिश किसानों के लिए नाकाफी है। सबसे ज्यादा 50 MM बारिश मुंगेली में रिकॉर्ड की गई। फिलहाल, मानसून प्रदेश के करीब 80% हिस्से को कवर कर चुका है। बस्तर में बारिश को लेकर सबसे बेहतर स्थिति है, फिर भी यहां 54% तक कम पानी गिरा है। वहीं राजनांदगांव समेत कई जिलों में 80% तक कम बारिश हुई है।
किसानों के लिए चिंताजनक खबर
दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है। किसानों का कहना है कि अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान बोनी का कार्य प्रभावित हुआ है। खेतों में नमी की कमी के कारण खेती का काम निर्धारित समय से पीछे चल रहा है। किसानों को डर है कि यदि आने वाले दिनों में भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। इसके अलावा ग्रामीण बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने पूर्वजों से 1964-65 के सूखे की कहानियां सुनी हैं और कहीं वैसी स्थिति दोबारा न बन जाए, इसकी चिंता उन्हें सता रही है।
कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवायजरी
संभावित परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र धमतरी ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कम अवधि में पकने वाली धान किस्मों को अपनाने, धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता देने, खेतों में मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने और वैकल्पिक फसलों जैसे उड़द, तिल तथा अरहर की खेती पर भी विचार करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते रणनीति बदलकर किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं फिलहाल धमतरी के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं।
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