CM Sai on Dhan Kharidi Date Extension: धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं? खुद सीएम साय ने किया खुलासा, कहा- दो दिन पहले ही की थी समीक्षा

Ads

CM Sai on Dhan Kharidi Date Extension: धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं? खुद सीएम साय ने किया खुलासा, कहा- दो दिन पहले ही की थी समीक्षा

  •  
  • Publish Date - January 30, 2026 / 02:31 PM IST,
    Updated On - January 30, 2026 / 02:31 PM IST

CM Sai on Dhan Kharidi Date Extension: धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं? खुद सीएम साय ने किया खुलासा, कहा- दो दिन पहले ही की थी समीक्षा / Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • आज अंतिम दिन है और खरीदी अच्छे से जारी है
  • मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख बढ़ाने की आवश्यकता नहीं
  • कांग्रेस आज प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रही

रायपुर: CM Sai on Dhan Kharidi Date Extension छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आज आखिरी दिन है। सरकार की तय गाइडलाइन के अनुसार 31 जनवरी तक​ धान खरीदी होनी थी, लेकिन कल यानि 31 जनवरी को रविवार होने के चलते सरकारी कामकाज बंद रहेगा। ऐसे में 31 जनवरी को जारी किए गए टोकन की भी आज ही धान खरीदी होगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 29 जनवरी तक 23.55 लाख किसानों से 128.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की है। इस बात की जानकारी खुद सीएम साय ने ट्वीट करके जानकारी दी है। वहीं, कांग्रेस लगातार ये आरोप लगा रही है कि अब तब कई किसान धान नहीं बेच पाए हैं और इसी मुद्दे को लेकर आज आंदोलन भी कर रही है। कांग्रेस के आरोपों और धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं? इस पर मीडिया के सामने दो टूक में जवाब दे दिया है।

धान खरीदी की तारीख बढ़ेगी या नहीं?

CM Sai on Dhan Kharidi Date Extension सीएम साय ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि आज अंतिम दिन है, मुझे विश्वास है धान खरीदी अच्छे से जारी है। दो दिन पहले धान खरीदी की समीक्षा की थी, जिसके बाद विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसान का धान बिकना चाहिए। धान खरीदी की तारीख बढ़ाने को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस विपक्ष का धर्म निभा रही है, लेकिन कांग्रेस मुद्दाविहीन है और क्या करेगी?

राजेश अग्रवाल ने कहा नहीं बढ़ेगी धान खरीदी की तारीख

वहीं, धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन को लेकर कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि धान खरीदी के लिए समय बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। छत्तीसगढ़ में पर्याप्त मात्रा में धान खरीदी हुई है, किसानों का एक-एक दाना धान खरीद रहे हैं। कांग्रेस देखे, किस मुंह से आरोप लगती है।

धान खरीदी 2025-26: अब तक के आंकड़े

विवरण आंकड़े (29 जनवरी 2026 तक)
कुल खरीदे गए धान की मात्रा 128.23 लाख मीट्रिक टन
लाभान्वित किसान 23.55 लाख
दुर्ग जिले में शेष किसान 9,500 से अधिक
दुर्ग में शेष धान की मात्रा 3.04 लाख क्विंटल

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साधी चुप्पी

धान खरीदी की तारीख बढ़ाने को लेकर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जिन किसानों के धान बचे हुए है उनके धान को खरीदने की व्यवस्था की गई है अभी 31 तक का समय है। जिन किसानों ने उत्पादन किया है उनका उचित मूल्य मिलेगा। वहीं वे मियाद बढ़ाने के प्रश्न पर मौन रह गए।

9500 से अधिक किसान नहीं बेच पाए धान

बता दे दुर्ग जिले में कुल 102 धान खरीदी केंद्र है, जिनमें 113623 किसानों ने 120179 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन कराया था। इस वर्ष कुल 61.64 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 53.70 लाख क्विंटल धान खरीदा गया है। अब भी 9500 से अधिक किसान धान बेचने से वंचित रह गये है। ऐसे में कुल 3.04 लाख क्विंटल धान शेष बचा हुआ है।

ये भी पढ़ें

क्या 31 जनवरी को धान खरीदी केंद्र खुलेंगे?

नहीं, 31 जनवरी को रविवार होने के कारण केंद्र बंद रहेंगे। 31 तारीख के टोकन वाले किसानों को आज (30 जनवरी) ही धान लाने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तारीख बढ़ाने पर क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने विभाग को हर किसान का धान खरीदने के निर्देश दिए हैं, लेकिन तारीख बढ़ाने की मांग कर रही कांग्रेस को उन्होंने 'मुद्दाविहीन' बताया।

दुर्ग जिले में इतने किसान शेष क्यों रह गए?

दुर्ग जिले में लक्ष्य 61.64 लाख क्विंटल था, लेकिन अभी भी 3.04 लाख क्विंटल धान बचा है। किसानों का कहना है कि बारदाने की कमी और तकनीकी दिक्कतों के कारण वे समय पर धान नहीं ला पाए।

क्या शाम तक तारीख बढ़ने का कोई आदेश आ सकता है?

राजनीतिक दबाव को देखते हुए संभावना बनी रहती है, लेकिन मंत्री राजेश अग्रवाल के बयान और कृषि मंत्री की चुप्पी से लग रहा है कि सरकार आज रात 12 बजे पोर्टल बंद कर देगी।

160 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य का क्या होगा?

अब तक 128.23 लाख टन की खरीदी हुई है। यदि तारीख नहीं बढ़ती है, तो सरकार अपने 160 लाख मीट्रिक टन के विशाल लक्ष्य से लगभग 30 लाख टन पीछे रह सकती है।