Lakhpati Didi Chhattisgarh : मजदूरी से लखपति दीदी तक का सफर, धमतरी की मधु कंवर ने ऐसे बदली अपनी तकदीर, अब गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

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धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत की मधु कंवर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। कभी खेतों में मजदूरी करने वाली मधु आज गांव में कॉमन सर्विस सेंटर चलाकर ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं दे रही हैं और क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 04:41 PM IST

Lakhpati Didi Chhattisgarh / Image Source : CGDPR

HIGHLIGHTS
  • धमतरी की मधु कंवर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बनीं ‘लखपति दीदी’
  • गांव में कॉमन सर्विस सेंटर खोलकर ग्रामीणों को दे रही डिजिटल सेवाएं
  • स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन, धान व्यापार और अन्य स्वरोजगार से बढ़ी आय

रायपुर : lakhpati didi chhattisgarh राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण गरीबी उन्मूलन परियोजना है। यह योजना स्व-रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण गरीबों को संगठित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत निवासी  मधु कंवर आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।कभी आर्थिक तंगी के कारण दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली मधु कंवर ने अपने संघर्ष, मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा बदल दी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

गांव में ही मिल रही डिजिटल सेवाएं

आज मधु कंवर अपने गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, आधार कार्ड अपडेट, श्रम कार्ड पंजीयन, आयुष्मान कार्ड, बिजली बिल भुगतान सहित कई ई-गवर्नेंस सेवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध हो रही हैं। madhu kanwar lakhpati didi  इस पहल से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी शासकीय सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। इस कार्य से मधु को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है।

आजीविका मिशन से मिली नई राह

मधु कंवर बताती हैं कि एक समय परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। women empowerment chhattisgarh इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “जय माँ कर्मा महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धान खरीदी-बिक्री, मशरूम उत्पादन और छोटे स्वरोजगार के कार्य शुरू किए। समूह से ऋण सुविधा मिलने पर उन्होंने अपने घर में ही कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किया, जो धीरे-धीरे उनकी आय का मजबूत साधन बन गया।

महिलाओं के लिए बढ़ रहा स्वरोजगार

मधु कंवर के समूह की महिलाएं आज कई आय संवर्धन गतिविधियों से जुड़ी हैं। इनमें मोमबत्ती निर्माण, केक बनाना, मशरूम उत्पादन, मछली पालन और बैंक सखी के रूप में कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

आज मधु कंवर न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके प्रयासों से गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और सुशासन की पहल से मधु कंवर जैसी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।

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मधु कंवर कौन हैं?

मधु कंवर धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत की निवासी हैं, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं और क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।

मधु कंवर आज क्या काम कर रही हैं?

वह अपने गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) चलाकर ग्रामीणों को कई ई-गवर्नेंस सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

उन्हें आत्मनिर्भर बनने में किस योजना से मदद मिली?

उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला।