Lok Sabha Election 2024: दावे.. तंज.. बयान.., इलेक्शन गेम ऑन! लोकसभा चुनाव में जीतने के लिए रणनीति पर काम कर रही पार्टियां
Lok Sabha Election 2024: दावे.. तंज.. बयान.., इलेक्शन गेम ऑन! लोकसभा चुनाव में जीतने के लिए रणनीति पर काम कर रही पार्टियां
Lok Sabha Election 2024
रायपुर। छत्तीसगढ में दोनों ही पार्टियां लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुकी है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में, अब तक के सबसे ज्यादा वोट परसेंट और सबसे ज्यादा विधानसभा सीटों के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा के हौसले बुलंद हैं। वो भी इतने कि भाजपा नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस में कोई नेता लोकसभा चुनाव ही नहीं लड़ना चाहते हैं। जाहिर सी बात है कि बयान से तिलमिलाई कांग्रेस इसे सत्ता का अहंकार बता रही है और चुनौती देने को तैयार है, तो क्या बीजेपी ये चुनौती एक्सेप्ट करेगी और क्या कांग्रेस चुनाव से पहले डरी हुई है?
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इन सबके बीच कांग्रेस अध्यक्ष बार-बार दावा कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में इस बार उनकी 5 सीटें आएंगी तो, वहीं बीजेपी बार-बार पूरी 11 सीटें जीतने का दावा कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ दोनों ही दल लगातार बैठकें और मंथन कर 24 जीतने के लिए रणनीति पर काम कर रही है। मगर इस बार के चुनाव से पहले जो तस्वीर देखने को मिल रही है उस पूरी क्रोनोलॉजी को भी समझना जरूरी है।
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54 विधानसभा सीट और 46.27 प्रतिशत का वोट शेयर, 2023 के विधानसभा चुनाव का ये आंकड़ा, 24 सालों के इतिहास में बीजेपी ने ना तो इससे पहले कभी पार्टी ने इतनी सीट जीती और ना ही कभी इतना ज्यादा वोट प्रतिशत हासिल कर सका। वो भी तब, जब पांच साल पहले यही भाजपा 14 सीट और 32.97 प्रतिशत वोट शेयर के साथ, अब तक के सबसे निचले पायदान पर थी। इस प्रचंड जीत के बाद लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि भाजपा के मंत्री बयान दे रहे हैं कि देश में 400 सीट और छत्तीसगढ़ में सभी 11 की 11 सीट भाजपा जीतने जा रही है। कांग्रेस के नेता तो चुनाव तक लड़ना नहीं चाह रहे हैं।
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मंत्री केदार कश्यप के इस बयान ने कांग्रेस को तिलमिलाकर रख दिया है। दरअसल, कल यानी 26 जनवरी को ही प्रदेश कांग्रेस भवन में लोकसभा चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होने जा रही है। हर लोकसभा के दिग्गज नेता से पार्टी प्रभारी सचिन पायलट बैठक करने जा रहे हैं। वहीं, 27 जनवरी को लोकसभा चुनाव के लिए ही, चुनाव समिति की बैठक है। पीसीसी संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये सत्ता का अहंकार है। शायद केदार कश्यप भूल गए हैं कि 2018 के चुनाव में वो खुद चुनाव हार चुके हैं। चाहे तो वो बस्तर से लोकसभा चुनाव लड़कर फिर आजमा सकते हैं।
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दोनों पार्टियां अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी हैं। तीखे बयान और आरोप से साफ है कि लोकसभा के महायुद्ध के लिए बीजेपी-कांग्रेस ने कमर कस ली है। मगर सवाल ये है कि क्या छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं का अभाव हो गया है और क्या लोकसभा चुनाव में सभी 11 सीटें बीजेपी के खाते में जानी वाली है ?

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