शह मातThe Big Debate: ‘जिसको जाना है..जाए’,जंबूरी का ‘लंका कांड’! क्या बृजमोहन अग्रवाल के लिए दिल्ली से सीधा और साफ संदेश है?

Rover-Ranger Jamboree: 'जिसको जाना है..जाए',जंबूरी का 'लंका कांड'! क्या बृजमोहन अग्रवाल के लिए दिल्ली से सीधा और साफ संदेश है?

शह मातThe Big Debate: ‘जिसको जाना है..जाए’,जंबूरी का ‘लंका कांड’! क्या बृजमोहन अग्रवाल के लिए दिल्ली से सीधा और साफ संदेश है?

Rover-Ranger Jamboree | Photo Credit: IBC24 File

Modified Date: January 9, 2026 / 11:48 pm IST
Published Date: January 9, 2026 11:48 pm IST
HIGHLIGHTS
  • जंबूरी आयोजन से पहले बीजेपी में गुटबाजी और करप्शन के आरोप
  • बृजमोहन अग्रवाल ने अध्यक्ष पद से हटाए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी
  • कांग्रेस ने इसे कमीशन का खेल बताते हुए बीजेपी पर हमला बोला

रायपुर: Rover-Ranger Jamboree छत्तीसगढ़ में सत्तासीन बीजेपी के भीतर, स्काउट-एंड-गाइड के पहले रोवर-रेंजर जंबूरी आयोजन से पहले कमीशन, अहम, वर्चस्व, गुटबाजी, करप्शन जैसे आरोप लगे, लेकिन इस सियासी घमासान के बीच जंबूरी आयोजन, तय तारीख 9 जनवरी से शुरू हो गया। आयोजन की शुरूआत के लिए पहुंचे, नेशनल स्काउट एंड गाइड के अध्यक्ष अनिल जैन ने इस पूरे विवाद पर कहा कि, राज्य के नियम साफ हैं कि, राज्य का स्कूल शिक्षा मंत्री ही राज्य स्काउट-गाइड का पदेन अध्यक्ष होता है। अब गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री हैं तो वही अध्यक्ष हुए, अग्रवाल ने पदेन अध्यक्ष रहते हुए समिति से मंजूरी ली, लेकिन वो इलेक्टेड अध्यक्ष नहीं हैं जो हमेशा रहेंगे, कोर्ट तो कोई भी जा सकता है।

CG News दरअसल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल उन्हें छग स्काउट-गाइड परिषद के अध्यक्ष पद से हटाए जाने को हाईकोर्ट से चैलेंज कर चुके हैं। अग्रवाल ने दावा किया कि, अगर मुझे हटाए बिना अध्यक्ष की नियुक्ति होगी तो कोर्ट जाऊंगा।

इधर, बीजेपी को घेरेते हुए कांग्रेस कह रही है कि ये पूरा झगड़ा कमीशन और माल का है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि, बीजेपी में बृजमोहन, रेणुका सिंह, राजेश मूणत, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर जैसे सभी सीनियर्स के साथ गलत बर्ताव हो रहा है।

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कुल मिलाकर प्रदेश के सबसे अनुभवी नेता, पूर्व मंत्री, सांसद बृजमोहन अग्रवाल का अपनी ही पार्टी के विरोध में कोर्ट जाना कांग्रेस के लिए बीजेपी को घेरने का बड़ा मौका दे रहा है। क्या ये पदेन अध्यक्ष के नियमों का कोई लूपहोल है जिसका फायदा उठाया गया? अगर ऐसा था तो पार्टी के भीतर ये मसला क्यों ना सुलझ सका? क्या अब मामला बृजमोहन अग्रवाल बनाम सरकार बन चुका है या फिर विपक्ष के आरोपों के मुताबिक ये सिर्फ और सिर्फ कमीशन का खेल है?

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