Bhopal Barkatullah University BEd College Scam : राजधानी की इस मशहूर यूनिवर्सिटी में B.Ed का बड़ा खेल! खेत में मिला कॉलेज, फिर कैसे बंटती रहीं डिग्रियां?
भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कथित फर्जी B.Ed और B.Sc-B.Ed कॉलेजों का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में ऐसे संस्थानों का खुलासा हुआ है जो कागजों पर संचालित बताए गए, जबकि मौके पर खेत मिले। आरोप है कि बिना निरीक्षण वर्षों तक संबद्धता देकर डिग्रियां बांटी जाती रहीं।
Bhopal Barkatullah University BEd College Scam / CREDIT : FILE
- कई B.Ed और B.Sc-B.Ed कॉलेजों पर फर्जी तरीके से संबद्धता देने के आरोप।
- जांच में एक ही खसरा नंबर पर कई कॉलेज और कुछ जगह सिर्फ खेत मिले।
- वर्षों तक सैकड़ों छात्रों को डिग्रियां जारी होने का दावा।
भोपाल : Bhopal Barkatullah University BEd College Scam : भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध फर्जी महाविद्यालयों द्वारा बीएड और बीएससी-बीएड की डिग्रियां बांटने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना निरीक्षण के ऐसे कॉलेजों को बीएड, डीएड और बीएससी-बीएड की पढ़ाई कराने की संबद्धता दे दी गई, यानी उनकी प्रोफाइल को अप्रूव कर दिया गया, जबकि ये कॉलेज न तो जरूरी मानकों का पालन कर रहे थे और न ही कई कॉलेज जमीन पर मौजूद हैं। कई संस्थान सिर्फ कागजों पर संचालित बताए जा रहे हैं।
सभी अनिवार्य सुविधाएं होना जरूरी है
मध्य प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के बाद अब भविष्य के शिक्षक तैयार करने वाले बीएड और डीएड कॉलेजों की मान्यता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के मुताबिक, हर साल बीएड और डीएड कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले संस्थानों का निरीक्षण होना चाहिए। कॉलेज में भवन, क्लासरूम, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, हॉस्टल, खेल मैदान और विद्यार्थियों के अनुपात में पर्याप्त शिक्षकों जैसी सभी अनिवार्य सुविधाएं होना जरूरी है आरोप है कि इन सभी नियमों को दरकिनार कर वर्षों तक सिर्फ कागजों पर निरीक्षण कर फर्जी कॉलेजों को मान्यता दी जाती रही। फर्जी कॉलेजों की जानकारी लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया।
एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
इस मुद्दे को लेकर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया। इसके बाद कुछ कॉलेजों की संबद्धता पर रोक लगाई गई। जांच में सामने आया कि एक ही खसरा नंबर पर तीन-तीन कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जबकि नियम के अनुसार दो कॉलेजों के बीच निर्धारित दूरी होना जरूरी है। कई कॉलेज ऐसे भी पाए गए, जो जमीन पर कहीं मौजूद ही नहीं हैं। इसके बावजूद छोटी-मोटी कमियां बताकर और कॉलेजों से शपथपत्र लेकर उन्हें फिर से संबद्धता देने का रास्ता साफ कर दिया गया।
जमीन पर खेत के अलावा कुछ भी नहीं आया नज़र
IBC24 की टीम जब ऐसे ही एक कथित फर्जी कॉलेज की पड़ताल करने विदिशा रोड स्थित ग्राम मुगलिया कोट पहुंची, तो वहां बगलामुखी कॉलेज का बोर्ड दिखाई दिया। Barkatullah University Bhopal दस्तावेजों के मुताबिक, इसी परिसर में श्रीराम कॉलेज भी संचालित होना बताया गया है। दोनों का खसरा क्रमांक 149/148/2/1 दर्ज है। मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर कच्चे रास्ते से खेतों के बीच बगलामुखी कॉलेज का गेट मिला, जहां कॉलेज के प्राचार्य एम.एस. मिश्रा से बातचीत हुई। लेकिन विश्वविद्यालय के दस्तावेजों के अनुसार जिस खसरा क्रमांक 148/149/2/1 पर श्रीराम कॉलेज संचालित होना बताया गया है, वहां जमीन पर खेत के अलावा कुछ भी नजर नहीं आया।हैरानी की बात यह है कि पिछले 12 वर्षों से श्रीराम कॉलेज के नाम पर बीएड और बीएससी-बीएड के कोर्स संचालित होते रहे हैं। औसतन हर साल 100 से 150 छात्र यहां से बीएड और बीएससी-बीएड की डिग्री लेकर निकल रहे हैं। पूरे घटनाक्रम के बाद संबद्धता, प्रवेश और परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बच्चों का भविष्य बचाने के लिए शपथपत्र का रास्ता अपनाया
रजिस्ट्रार की नोटशीट के अनुसार, मंत्री के निर्देश पर 82 बीएड कॉलेजों की प्रोफाइल ई-प्रवेश पोर्टल पर ओके की गई। यानी कार्यपरिषद की औपचारिक मंजूरी से पहले ही इन कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता खोल दिया गया। इसके अगले ही दिन कार्यपरिषद ने 125 कॉलेजों को सशर्त निरंतरता देने पर सहमति भी दे दी। मंत्री का तर्क है कि बच्चों का भविष्य बचाने के लिए शपथपत्र का रास्ता अपनाया गया, लेकिन यही सबसे बड़ा सवाल बन जाता है।
भविष्य वास्तव में सुरक्षित रहेगा ?
क्या बच्चों का भविष्य बचाने के नाम पर उन कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, जिन पर जांच चल रही है? जिनमें गंभीर कमियां मिली हैं? जो अपने दर्ज पते पर मौजूद ही नहीं मिले? अगर बाद में इन कॉलेजों का शपथपत्र गलत साबित होता है, तो उन छात्रों का क्या होगा, जिन्होंने फीस जमा कर दी होगी, प्रवेश ले लिया होगा और पढ़ाई भी शुरू कर दी होगी? ऐसे में क्या उनका भविष्य वास्तव में सुरक्षित रहेगा?
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