केंद्रीय मंत्री आठवले ने गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों पर रोक लगाने की विहिप की मांग का विरोध किया
केंद्रीय मंत्री आठवले ने गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों पर रोक लगाने की विहिप की मांग का विरोध किया
रायपुर, नौ सितंबर (भाषा) केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने नवरात्र के दौरान गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों के शामिल होने पर रोक लगाने के विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के आह्वान का बुधवार को विरोध किया।
उन्होंने कहा कि भारत संविधान से चलता है, जो सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है।
छत्तीसगढ़ के एक दिन के दौरे पर यहां स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा पहुंचे आठवले ने पत्रकारों से कहा कि ऐसा रुख सही नहीं है क्योंकि अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होने का अधिकार है।
महाराष्ट्र में विहिप के नेताओं द्वारा यह कहे जाने पर कि जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, उन्हें ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों से दूर रहना चाहिए, आठवले ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह रुख सही नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान सभी धर्मों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है। भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, लिंगायत, पारसी और कई अन्य धर्मों के लोग रहते हैं, तथा संविधान सभी धर्मों की रक्षा करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह कहना ठीक नहीं है कि मुसलमानों को गरबा में शामिल नहीं होना चाहिए। हिंदू और मुस्लिम समुदायों को एक साथ आकर देश के लिए काम करने की ज़रूरत है।’’
आठवले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष भी हैं।
उन्होंने राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह का उदाहरण दिया और कहा कि बड़ी संख्या में हिंदू वहां जाते हैं।
आठवले ने कहा, ‘‘हमारा देश ऐसा है जहां सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना चाहिए। हम ऐसे रुख का विरोध करते हैं। ऐसा रुख संविधान के खिलाफ है।’’
आरक्षण के मुद्दे पर आठवले ने कहा कि यह नीति कमजोर वर्गों को अवसर देकर देश को मजबूत करने के लिए शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘जब जातिवाद खत्म हो जाएगा, तो हम आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण तब दिया गया था जब 1950 में संविधान लागू हुआ था, जबकि अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण 1990-91 में वीपी सिंह सरकार के दौरान शुरू किया गया था।
उन्होंने कहा कि बाद में नरेन्द्र मोदी सरकार ने एससी, एसटी या ओबीसी श्रेणी में न आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया।
आठवले ने कहा, ‘‘आरक्षण जाति पर आधारित है। हालांकि संविधान ने अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत को खत्म कर दिया है, फिर भी दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार होते हैं। जब तक जातिवाद खत्म नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप जातिवाद को खत्म कर सकते हैं, तो हम आरक्षण छोड़ने को तैयार हैं। लेकिन आरक्षण का विरोध करना सही नहीं है। यह संविधान के खिलाफ है।’’
आठवले ने कहा कि जो लोग आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उन्हें बातचीत करनी चाहिए और अपनी मांगें रखनी चाहिए।
मंगलवार को वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘जेन जी’ और युवाओं के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी हमेशा गलत बयान देते हैं। मोदी जी ने ‘जेन जी’ से कहा है कि वे झूठे वादे करने वाले लोगों पर ध्यान न दें।’’
आठवले ने कहा कि सरकार युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष दोनों जरूरी हैं, तथा देश की प्रगति के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। लेकिन आज का विपक्ष केवल आलोचना करने वाली संस्था बनकर रह गया है।’’
आठवले ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, और केंद्र दलितों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
बाद में, यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आठवले ने केंद्र की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है और कोरबा में 130 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले इंडियन ऑयल बॉटलिंग प्लांट का प्रस्ताव रखा गया है।
आठवले ने कहा, ‘‘सड़क, रेलवे, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे में केंद्र का बढ़ता निवेश राज्य में संचार की सुविधा, औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को नई गति देगा।’’
उन्होंने कहा कि राज्य में एक करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं और जनवरी 2026 तक 41 लाख से अधिक ‘नल-जल कनेक्शन’ दिए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 25 लाख से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है।
आठवले ने बताया कि 2014 में योजना शुरू होने के बाद से देश भर में 59.15 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के लगभग 1.89 करोड़ खाते शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पीएम मुद्रा योजना के तहत देश भर में 60.05 करोड़ से ज़्यादा लोगों को ऋण मिला है, जबकि छत्तीसगढ़ में लगभग 1.13 करोड़ लोगों को इस योजना का फ़ायदा हुआ है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण परिवारों और कमज़ोर वर्गों को जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
भाषा संजीव
मनीषा नेत्रपाल
नेत्रपाल

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