US Return Avalokiteshvara Statue: अमेरिका पहुंच गई छत्तीसगढ़ की ये बेशकीमती प्रतिमा, इतने सालों बाद ऐसे खुला राज, कीमत उड़ा देगी होश

US Return Avalokiteshvara Statue: अमेरिका पहुंच गई छत्तीसगढ़ की ये बेशकीमती प्रतिमा, इतने सालों बाद ऐसे खुला राज, कीमत उड़ा देगी होश

US Return Avalokiteshvara Statue: अमेरिका पहुंच गई छत्तीसगढ़ की ये बेशकीमती प्रतिमा, इतने सालों बाद ऐसे खुला राज, कीमत उड़ा देगी होश

US Return Avalokiteshvara Statue/Image Credit: AI Generated

Modified Date: May 17, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: May 17, 2026 7:16 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सिरपुर से चोरी हुई दुर्लभ कांस्य प्रतिमा 40 साल बाद मिली
  • अमेरिका ने भारत को 657 प्राचीन वस्तुएं लौटाईं
  • प्रतिमा की कीमत करीब 19 करोड़ रुपये आंकी गई

US Return Avalokiteshvara Statue: छत्तीसगढ़ से करीब 40 साल पहले चोरी हुई बेहद दुर्लभ प्रतिमा अब मिल गई है। इस मूर्ति को इंटरनलेशनल स्मगलिंग मार्केट में बेचकर अमेरिका पहुंचा दिया गया था। अब अमेरिका इस प्रतिमा को भारत लौटा रहा है और ये प्रतिमा जल्द छत्तीसगढ़ भी आएगी। आपको बता दें यह प्रतिमा (US Return Avalokiteshvara Statue) सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास से मिली थी।

कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

अमेरिका ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं भारत को वापस सौंप दी हैं। इनमें सबसे खास है अवलोकितेश्वर(US Return Avalokiteshvara Statue) की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20 लाख डॉलर यानी करीब 19 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह प्रतिमा छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ऐतिहासिक सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास से मिली थी।

तस्करी के जरिए अमेरिका पहुंचा दी गई

जानकारी के मुताबिक, इस प्रतिमा (US Return Avalokiteshvara Statue) का निर्माण सिरपुर के कारीगर द्रोणादित्य ने किया था। वर्ष 1939 में मिले कांस्य प्रतिमाओं के भंडार का यह अहम हिस्सा था, जिसे रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन वर्ष 1982 के आसपास यह प्रतिमा संग्रहालय से चोरी हो गई और तस्करी के जरिए अमेरिका पहुंचा दी गई। साल 2014 में न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में इस प्रतिमा की पहचान हुई, जिसके बाद जांच शुरू की गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2025 में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी की ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ ने इसे जब्त कर लिया। बाद में न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में यह धरोहर भारत को सौंप दी गई।

संग्रहाध्यक्ष महंत प्रताप पारख ने बताया कि घासीदास संग्रहालय यह प्रतिमा अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए भी खास मानी जाती है। इसमें अवलोकितेश्वर (US Return Avalokiteshvara Statue) को अलंकृत सिंहासन पर बैठे हुए दिखाया गया है, जबकि ऊपर दोहरे कमल की नक्काशी इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कला तस्कर सुभाष कपूर और उसके नेटवर्क से जुड़ी नैन्सी वीनर का नाम भी सामने आया है। भारत के लिए यह सिर्फ एक प्रतिमा की वापसी नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की बड़ी जीत मानी जा रही है।

 

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लेखक के बारे में

जागेश साहू- 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.