Vishnu Ka Sushasan: बढ़ेंगे रोजगार के अवसर.. ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, साय सरकार की ‘गौधाम योजना’ से संवरेगा छत्तीसगढ़
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर.. ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, साय सरकार की ‘गौधाम योजना’ से संवरेगा छत्तीसगढ़, Vishnudev Government's Gau Dham Scheme
रायपुरः Vishnu Ka Sushasan: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आने के बाद विकास की एक नई लहर देखने को मिल रही है। सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकेंद्रित नीतियों के जरिए शासन की एक नई कार्यशैली स्थापित करने का प्रयास किया है। छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार ने गौ सरंक्षण के लिए भी कई अहम प्रयास किए हैं। इसी तारतम्य में सरकार ने ‘गौधाम योजना‘ शुरू की है। यह कदम न केवल पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा। Gau Dham Scheme
दरअसल, भारत में गौवंश केवल एक पशु नहीं, बल्कि कृषि, संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा रहा है। छत्तीसगढ़ में ये देखा जा रहा था कि गौवंश की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इसके लिए सरकारी प्रयास की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। साय सरकार ने गौवंशों के संरक्षण के लिए प्रयास की और गौधाम योजना लेकर आई है। सीएम साय ने 14 मार्च को बिलासपुर के तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम लाखासार स्थित इस योजना की शुरूआत की। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्थापित 29 गौधामों का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण भी किया गया। सरकार ने इन गौधामों को सुरभि सुरभि गौधाम की संज्ञा दी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने न केवल गौधामों की शुरूआत की है, बल्कि गौ अभ्यारण्य बनाने का भी ऐलान किया है। 14 मार्च को सीएम साय ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया।
क्या है योजना का उद्देश्य? (Gau Dham Scheme)
Vishnu Ka Sushasan: राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ गई गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। गौधाम योजना से प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़ी संख्या में चरवाहों एवं गौसेवकों को नियमित आय का साधन मिलेगा। पशुओं की नस्ल सुधार कर उन्हें अधिक दूध देने और खेती-किसानी में पूरी क्षमता से उपयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रमों को भी गति मिलेगी, जिससे ग्राम स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
अवैध तस्करी और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस?
Gau Dham Scheme छत्तीसगढ़ सरकार ने यह योजना विशेष रूप से तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े गए पशुओं और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की है। राज्य में अवैध पशु तस्करी एवं परिवहन पर पहले से रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु जब्त होते हैं। इन पशुओं और घुमंतु पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए ही यह योजना शुरू की जा रही है। प्रत्येक गौधाम में क्षमता के अनुसार अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे। गौधाम योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपए प्रतिमाह और गौसेवकों को 13,126 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही मवेशियों के चारे के लिए प्रतिदिन निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष 20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष 30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो।
गौधाम की स्थापना के लिए चयनित होगी उपयुक्त शासकीय भूमि
ऐसी शासकीय भूमि, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। जिन गौठानों में पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से सटे चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि आसपास की पंजीकृत गौशाला की समिति संचालन हेतु असहमति व्यक्त करती है, तो अन्य स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारी समिति संचालन के लिए आवेदन कर सकेगी। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था और आयोग के बीच करार होगा, जिसके पश्चात गौधाम का संचालन उस संस्था को सौंपा जाएगा।
गोबर खरीदी नहीं होगी, चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन (Vishnudev Government)
गौधाम में गोबर खरीदी नहीं होगी, पशुओं के गोबर का उपयोग चरवाहा स्वयं करेगा। यहां निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा और उनका वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन होगा। संचालन में गौशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य गौ सेवा आयोग में पंजीकृत गौशाला की समिति, स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनी और सहकारी समिति संचालन के लिए पात्र होंगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं की संख्या के आधार पर राशि दी जाएगी। गौधाम से सटी भूमि पर चारा विकास के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। एक एकड़ में चारा विकास कार्यक्रम पर 47,000 रुपए और पांच एकड़ के लिए 2,85,000 रुपए का प्रावधान है।
गौधाम बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र, बढ़ावा मिलेगा गौ उत्पादों को
प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पाद विषय पर प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, कीट नियंत्रक, गौ काष्ठ, गोनोइल, दीया, दंतमंजन, अगरबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण, उत्पादन और बिक्री के लिए भी गौधाम एक माध्यम बनेंगे।
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