शराब बिक्री के मामले में मेट्रो सिटी की बराबरी कर रहा कवर्धा, जानिए

शराब बिक्री के मामले में मेट्रो सिटी की बराबरी कर रहा कवर्धा, जानिए

शराब बिक्री के मामले में मेट्रो सिटी की बराबरी कर रहा कवर्धा, जानिए
Modified Date: November 29, 2022 / 08:45 pm IST
Published Date: April 2, 2019 8:56 am IST

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का गृह जिला कवर्धा यूं तो विकास के मामले में मेट्रो सिटी से कहीं पीछे है लेकिन एक मामले में यह मेट्रो सिटी की बराबरी कर रहा है। दरअसल कवर्धा जैसे छोटे से जिले में शराब की खपत सामान्य से कहीं अधिक है। यहां प्रतिवर्ष 138 करोड़ से अधिक की शराब मदिरा प्रेमी गटक रहे हैं। वर्ष 2018-19 में ही 169 करोड़ की शराब पी चुके है।

कवर्धा जैसे छोटे से जिले में शराब की इतनी खपत होना घातक साबित हो सकता है। वहीं सरकार चाहे किसी की भी आए पर शराबबंदी या शराबखोरी रोकने के मामले में आज भी कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रहे है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में कवर्धा की युवा पीढी नशे में डूबी नजर आएगी। शराबबंदी की मांग कवर्धा में समय-समय पर होती रही है लेकिन कभी भी इस ओर कारगर कदम नहीं उठाया गया।

यही कारण है कि विगत दो साल में पांच से अधिक दुकान बंद होने के बाद भी शराब की खपत में कहीं भी कमी नजर नहीं आ रही है। वर्ष 2017-18 में ही 138 करोड़ की शराब कवर्धा जिले में बिकी। वहीं वर्श 2018-19 में 169 करोड़ की शराब बेची गई है। छोटे से जिले में शराब की इतनी खपत होना चिंता का विषय बना हुआ है। इस मामले में जिला से लेकर प्रदेश स्तर पर शराब बंदी के लिए अनेक बार मांगें उठी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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वहीं जिला प्रशासन व अनेक समाजसेवी संगठन शराबखोरी बंद करने के लिए अनेक योजनाए चलाने की बात कहते रहे है पर जिस प्रकार से शराब की खपत हो रही है उससे नहीं लगता कि कही से भी योजना चलाने का लाभ जिले में दिखा हो। प्रतिवर्ष शराब की कीमत में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की जाती है। इसके बाद भी खपत में कमी होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है। दो साल की ही तुलना करें तो शराब की खपत में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई हैं। वहीं इससे कमाई का आंकड़ा भी बढा है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में युवा नशे में डूबे नजर आएंगे।


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