रायपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर सिलगेर में 17 मई को हुई फायरिंग पहले दिन से ही सवालों के घेरे में है। विपक्ष लगातार इस मामले में सरकार को घेरता रहा है, लेकिन अब सत्ता पक्ष के विधायक चंदन कश्यप ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा दिए हैं। इससे पहले विधायक मोहित केरकेट्टा का एक बयान भी सवाल खड़ा कर गया। 24 घंटे के अंदर दो विधायकों के बयान सामने आने के बाद पीसीसी अध्यक्ष पार्टी का लोकतंत्र बताकर बचाव में उतरे, लेकिन विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। ऐसे में सवाल यही है कि कांग्रेस विधायकों के सवाल पर सरकार कब संज्ञान लेगी?
नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप का आरोप है कि बस्तर में पुलिस ग्रामीणों को जबरदस्ती पकड़कर नक्सली बता रही है। आरोप इसलिए बेहद गंभीर है, क्योंकि ये बयान किसी विरोधी दल का नहीं बल्कि सत्ता रूढ़ कांग्रेस के विधायक और छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष का है। जी हां चंदन कश्यप कांग्रेस की उस 9 सदस्यीय दल में शामिल हैं, जो सिलगेर मामले की जांच के लिए बनी है।घटनास्थल रवाना होने से पहले MLA चंदन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिलगेर जैसा मामला नहीं होनी चाहिए। पुलिस बेगुनाहों को नक्सली बताकर जेल भेज रही है।
चंदन कश्यप का बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस ग्रामीणों को फर्जी नक्सली बता कर गिरफ्तार कर रही है? क्या पुलिस झूठा आत्मसमर्पण करा रही है? इन सवालो को लेकर बीजेपी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, इस पर हो रही सियासत का रूख करें।
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कांग्रेस विधायक का ये बयान उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया है, जो केंद्र सरकार के 7 साल की विफलताओं को गिनाने के लिए कांग्रेस ने रखा था। लेकिन पाली तानाखार विधायक मोहित केरकेट्टा शराब बिक्री के मुद्दे पर अपने ही सरकार को मुश्किल में डाल दिया। कुल मिलाकर बीते 24 घंटे में दो विधायकों के आए बयानों के सामने आने के बाद मामले की डैमेज कंट्रोल करने पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस में सबको अपनी बात रखने का हक है। मुख्यमंत्री सभी विधायकों की बात को संज्ञान में जरूर लेंगे। हालांकि कांग्रेस विधायकों के अपनी ही सरकार के फैसले और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवाल ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है।
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जाहिर है 2018 में प्रचंड बहुमत के साथ छत्तीसगढ़ की सत्ता में लौटी कांग्रेस कुछ महीनों बाद चुनावी तैयारियों में जुट जाएगी। ऐसे में चंदन कश्यप और मोहित केरकेट्टा जैसे विधायकों का बयान पार्टी और सरकार की दिक्कतें जरूर बढ़ाएंगे। वहीं विपक्ष को भी बैठे-बिठाए बड़ा हथियार मिल जाएगा।