देशभर में पहले दिन 1.91 लाख लोगों को लगी कोरोना वैक्‍सीन, किसी में नहीं दिखा गंभीर साइड इफेक्‍ट

देशभर में पहले दिन 1.91 लाख लोगों को लगी कोरोना वैक्‍सीन, किसी में नहीं दिखा गंभीर साइड इफेक्‍ट

देशभर में पहले दिन 1.91 लाख लोगों को लगी कोरोना वैक्‍सीन, किसी में नहीं दिखा गंभीर साइड इफेक्‍ट
Modified Date: November 29, 2022 / 08:21 pm IST
Published Date: January 16, 2021 5:09 pm IST

नई दिल्ली। कोरोना का दंश झेल रहे देशभर में शनिवार 16 जनवरी से 3006 केंद्रों पर एक साथ टीकाकरण अभियान के पहले दिन ही लगभग 1.91 लाख स्वास्थ्य कर्मियों व सफाई कर्मियों को टीका लगाया गया। कोरोना से जंग में ये अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। इसके साथ ही लाखों जिंदगियां और रोजगार लीलने वाली इस महामारी के खात्मे की उम्मीद जगी है।

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भारत ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके के साथ महामारी को मात देने के लिए पहला कदम उठाया है। खास बात यह कि जिन दो वैक्सीन से अभियान से शुरुआत की गई वे देश में ही निर्मित हैं और उसमें भी एक पूरी तरह स्वदेशी है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए शोधकर्ताओं और विज्ञानियों की सराहना करते हुए संकट काल में अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं का आभार जताया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश का पहला टीका दिल्ली के एम्स के सफाई कर्मी मनीष कुमार को स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की उपस्थिति में लगाया गया।

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टीका लगवाने के बाद मनीष ने बताया कि वे सुबह जब टीका लगवाने आए तो साथ के कई लोग घबरा रहे थे। इस पर अपने वरिष्ठों से बात कर उन्होंने सबसे पहले खुद टीका लगवाया। इसके बाद दूसरे नंबर पर स्वास्थ्य कर्मी धवल द्विवेदी ने टीका लगवाया।

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पहले दिन टीका लगवाने वाले प्रमुख लोगों में एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, भाजपा सांसद महेश शर्मा और बंगाल के मंत्री निर्मल माजी शामिल रहे। पॉल कोरोना महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा उपकरण एवं प्रबंधन को लेकर गठित अधिकार समूह के प्रमुख भी हैं। अभियान की शुरुआत से पहले राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री कहा कि टीके की दो खुराक लेनी बहुत जरूरी है। इन दोनों के बीच लगभग एक महीने का अंतर होना चाहिए। उन्होंने टीका लेने के बाद भी लोगों से कोरोना संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया और दवाई भी, कड़ाई भी का मंत्र दिया।

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प्रधानमंत्री अपने संबोधन के दौरान उस वक्त भावुक हो गए जब उन्होंने कोरोना काल के दौरान लोगों को हुई तकलीफों, अपने प्रियजनों को खोने और यहां तक कि उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल ना हो पाने के दर्द का जिक्र किया। रुंधे गले से प्रधानमंत्री ने महामारी के दौरान स्वास्थ्य यकíमयों और संक्रमण के जोखिम की आशंका वाले मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों की कुर्बानियों को याद किया जिनमें से सैकड़ों की संक्रमण की वजह से मौत हो गई।


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