मणिपुर के 14 संगठनों ने जनगणना-2027 से पहले एनआरसी अद्यतन करने की मांग की

मणिपुर के 14 संगठनों ने जनगणना-2027 से पहले एनआरसी अद्यतन करने की मांग की

मणिपुर के 14 संगठनों ने जनगणना-2027 से पहले एनआरसी अद्यतन करने की मांग की
Modified Date: July 9, 2026 / 12:15 pm IST
Published Date: July 9, 2026 12:15 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) मणिपुर के 14 नागरिक समाज संगठनों ने केंद्र सरकार से राज्य में चल रही जनगणना-2027 की प्रक्रिया पूरी करने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अद्यतन किये जाने का आग्रह किया है।

इन संगठनों का कहना है कि राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव और कथित अवैध प्रवास को लेकर चिंताओं के समाधान के लिए यह कदम आवश्यक है।

पांच से सात जुलाई तक दिल्ली दौरे पर रहे एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों से बुधवार को मुलाकात कर यह मांग रखी।

बैठकों के बाद जारी एक बयान में संगठनों ने कहा कि उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया है कि मणिपुर में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पूरी होने से पहले एनआरसी को अद्यतन करने की अधिसूचना जारी की जाए अथवा दोनों प्रक्रियाएं एक साथ संचालित की जाएं।

संगठनों ने यह भी मांग की कि एनआरसी की प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य के जनगणना-2027 के अंतिम जनसंख्या आंकड़े जारी नहीं किए जाएं तथा उससे पहले लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया भी नहीं शुरू की जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि म्यांमा से दशकों से जारी सीमा पार प्रवास के कारण मणिपुर की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव आया है। उसने गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकीय परिवर्तन संबंधी उच्चस्तरीय समिति से इस मुद्दे की जांच को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मणिपुर विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों और जनवरी 2023 में राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्राचार में भी राज्य में एनआरसी लागू करने की मांग की गई थी।

मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर में एनआरसी लागू करने की मांग कई मेइती संगठनों के बीच जोर पकड़ रही है।

इन संगठनों का दावा है कि म्यांमा से अवैध प्रवास पर प्रभावी रोक नहीं लग पाने के कारण राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति प्रभावित हुई है। हालांकि, कुकी-जो संगठनों ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि संघर्ष की वजह प्रवास नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे हैं।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन


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