2016 का आगजनी मामला: सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत अर्जी पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
2016 का आगजनी मामला: सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत अर्जी पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह 2016 के सुरजागढ़ लौह अयस्क खदान आगजनी मामले में वकील सुरेंद्र गाडलिंग की ज़मानत याचिका पर 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
गाडलिंग ने बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के जनवरी 2023 के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
यह याचिका न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आई।
गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में भी आरोपी हैं और उन्हें उस मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘उसी समय उन पर एक और मामला थोप दिया गया था।’’
सिब्बल ने कहा कि गाडलिंग आगजनी मामले में सात साल से ज्यादा समय से जेल में हैं।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि मामले को सुनवाई के लिए किसी ऐसे दिन सूचीबद्ध किया जा सकता है जो ‘नॉन-मिसलेनियस’ (गैर-विविध) दिन हो।
राजू ने कहा, ‘‘मुझे उनके खिलाफ सबूत पेश करने हैं।’’
सिब्बल ने तर्क दिया कि आरोपों के अनुसार, कुछ लोग आए और ट्रक जला दिए। उन्होंने कहा कि ट्रक जलाने के आरोपी सभी लोग पहले से ही जमानत पर हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘अपील को 14 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।’’
गत 21 जुलाई को, उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर ने गाडलिंग की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
माओवादी विद्रोहियों ने 25 दिसंबर 2016 को, कथित तौर पर 76 वाहनों को आग लगा दी थी, जिनका इस्तेमाल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सुरजागढ़ खदानों से लौह अयस्क ले जाने के लिए किया जा रहा था।
गाडलिंग पर माओवादियों को मदद मुहैया कराने का आरोप है। उन पर कई सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रचने का भी आरोप है, जिनमें से कुछ फरार हैं।
उन पर आतंकवाद रोधी कानून, गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने भूमिगत माओवादी विद्रोहियों को सरकारी गतिविधियों और कुछ इलाकों के नक्शों के बारे में गुप्त जानकारी दी थी।
उन पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों से सुरजागढ़ खदानों के संचालन का विरोध करने के लिए कहा और कई स्थानीय लोगों को आंदोलन में शामिल होने के लिए उकसाया। गडलिंग, एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में भी आरोपी हैं। यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुई एल्गार परिषद की बैठक में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा है।
पुलिस का दावा है कि इन भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।
साल 2017 में एल्गार परिषद की बैठक पुणे शहर के बीचों-बीच स्थित 18वीं सदी के महल-किले, शनिवारवाड़ा में हुई थी।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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