217 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए, 49 की संघर्ष में जान गई: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया

217 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए, 49 की संघर्ष में जान गई: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया

217 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए, 49 की संघर्ष में जान गई: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया
Modified Date: May 22, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: May 22, 2026 8:21 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कथित तौर पर 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए हैं, और इस लड़ाई में 49 की जान चली गई है।

उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक स्थिति रिपोर्ट में, केंद्र ने कहा कि भारत सरकार द्वारा रूसी फेडरेशन के साथ किए गए सतत राजनयिक सहयोग के अनुरूप 139 भारतीय नागरिकों को पहले ही उन अनुबंधों से मुक्त कर दिया गया है जिन पर उन्होंने रूसी सेना में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘लड़ाई में 49 भारतीय नागरिकों की जान जाने की खबर है। इसके अलावा, रूसी पक्ष ने 6 भारतीय नागरिकों के लापता होने की पुष्टि की है, जबकि 23 लोगों की स्थिति अभी पता नहीं है और मॉस्को में भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के साथ लगातार फॉलो-अप कर रहा है।’’

यह स्थिति रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय में एक याचिका में दाखिल की गई थी जिसमें केंद्र को उन 26 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्हें कथित तौर पर रूस में हिरासत में रखा गया है और यूक्रेन के साथ युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया है।

स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘यह बताया गया है कि विदेश मंत्रालय के पास मौजूद ताजा जानकारी के अनुसार, लगभग 217 भारतीय नागरिक कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल हुए।’’

शुक्रवार को, यह याचिका प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आई। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने स्थिति रिपोर्ट का जिक्र किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लापता लोगों का पता लगाने और शवों की पहचान करने में आसानी के लिए, 21 लोगों के परिवार के करीबी सदस्यों की डीएनए रिपोर्ट एकत्रित की गई हैं और भारत सरकार की सक्रिय मदद से रूसी अधिकारियों को भेजी गई हैं।

इसमें कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निपटाया जा रहा है और समाधान के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है, साथ ही प्रभावित परिवार को घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी जा रही है।

केंद्र ने कहा, ‘‘किसी भी भारतीय नागरिक के रूसी सेना में शामिल होने के बारे में जानकारी मिलते ही, दूतावास ने सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित व्यक्तियों की जल्द रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार रूसी अधिकारियों के साथ ऐसे मामलों को उठाया है।’’

इसमें कहा गया है कि दूतावास ने संबंधित परिवारों की सहमति से आठ मामलों में शव लाने में भी मदद की है और एक व्यक्ति के शव के संबंध में अभी जरूरी प्रक्रिया चल रही है।

इसमें कहा गया है, ‘‘ऐसे सभी मामलों में, खर्च भारतीय सामुदायिक कल्याण कोष से उठाया गया है। ऐसा लगता है कि कुछ भारतीय नागरिकों ने अपनी मर्जी से रूसी सेना में शामिल होने के लिए अनुबंधन पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने आकर्षक वेतन पैकेज के प्रलोभन में ऐसा किया। इसके अलावा, रूसी नागरिकता, दूसरे सामाजिक लाभ और मृत्यु होने पर लगभग 1,68,000 अमेरिकी डॉलर का मुआवजा देने का वादा भी किया गया था।’’

इसमें कहा गया है कि फरवरी 2024 से, भारत सरकार ने बार-बार भारतीय नागरिकों को रूस-यूक्रेन लड़ाई में शामिल होने से सावधान करते हुए और रूस में नौकरी के मौके ढूंढते समय सावधानी बरतने की सलाह देते हुए परामर्श जारी किए हैं।

केंद्र ने कहा कि जिन भारतीय नागरिकों को असल में रूसी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है, उनके मामलों में दूतावास के अधिकारी नियमित तौर पर हिरासत में लिए गए और जेल की सजा काट रहे लोगों से मिलने के लिए ‘कॉन्सुलर विजिट’ करते हैं ताकि उनकी खैरियत का पता लगाया जा सके।

इसमें कहा गया है कि कई दूसरे देशों के नागरिक भी बड़ी संख्या में रूसी सेना में शामिल हुए हैं।

भाषा वैभव रंजन

रंजन


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