जम्मू-कश्मीर में विकास को नई गति देने के लिए 4.12 लाख करोड़ रुपये की 61 परियोजनाएं शुरू: मुख्य सचिव

जम्मू-कश्मीर में विकास को नई गति देने के लिए 4.12 लाख करोड़ रुपये की 61 परियोजनाएं शुरू: मुख्य सचिव

जम्मू-कश्मीर में विकास को नई गति देने के लिए 4.12 लाख करोड़ रुपये की 61 परियोजनाएं शुरू: मुख्य सचिव
Modified Date: January 18, 2026 / 09:39 pm IST
Published Date: January 18, 2026 9:39 pm IST

जम्मू, 18 जनवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने शनिवार को कहा कि केंद्रशासित प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की एक नई लहर चल रही है, जिसमें संपर्क, बिजली, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों की परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

डुल्लू ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “जम्मू-कश्मीर में लाखों-करोड़ों की परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। हाल के वर्षों में विकास की गति में उल्लेखनीय तेजी आई है और यह गति जारी रहेगी।”

उन्होंने सरकार की विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) की सूची में शामिल 61 विकास कार्यों की कुल लागत 4.12 लाख करोड़ रुपये है।

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मुख्य सचिव ने कहा, “इसमें संपर्क, ऊर्जा और सामाजिक अवसंरचना जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इनमें से 69,000 करोड़ रुपये की 15 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष 3.43 लाख करोड़ रुपये की 46 परियोजनाएं चालू हैं।”

डुल्लू ने कहा कि कश्मीर घाटी को रेल संपर्क प्रदान करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है, चिनाब रेल पुल के पूरा होने के बाद उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला लाइन पर रेल सेवाएं शुरू हो गई हैं और संबंधित परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक स्वप्निल परियोजना (कश्मीर को रेल संपर्क) साकार हुई है। उत्तरी कश्मीर में सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार के लिए साधना दर्रा सुरंग सहित कई प्रमुख सड़क परियोजनाएं, सुरंगें और वैकल्पिक संपर्क गलियारे भी निर्माणाधीन हैं।”

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण संपर्क को मजबूत करने के लिए लगभग 4,300 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं और केंद्र को अतिरिक्त प्रस्ताव भेजे गए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रोत्साहन पैकेज ने प्रमुख व्यापारिक समूहों को जम्मू-कश्मीर की ओर आकर्षित किया है।

उन्होंने कहा, “एक बार ये पहल पूरी तरह से लागू हो जाने पर हमें जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देखने को मिलेंगे।”

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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