न्यायाधिकरणों के मामलों का डेटाबेस बनाया जाएगा

न्यायाधिकरणों के मामलों का डेटाबेस बनाया जाएगा

न्यायाधिकरणों के मामलों का डेटाबेस बनाया जाएगा
Modified Date: August 21, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: August 21, 2026 7:46 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) विभिन्न न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों में एकरूपता लाने के उद्देश्य से बनाए गए नए कानून के तहत 16 न्यायाधिकरणों और अपीलीय निकायों से संबंधित मामलों का एक डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

हाल ही में संसद द्वारा पारित न्यायाधिकरण सुधार विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण डेटा ग्रिड का प्रावधान किया गया है। यह कानून सरकार द्वारा तय की जाने वाली तारीख से लागू होगा।

विधेयक में डेटा ग्रिड को एक ऐसे पोर्टल के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें उसकी पहली अनुसूची में शामिल न्यायाधिकरणों से संबंधित सभी मामलों की जानकारी का संग्रह होगा।

पहली अनुसूची में 16 न्यायाधिकरणों और अपीलीय न्यायाधिकरणों के नाम दिए गए हैं। प्रस्तावित डेटा ग्रिड का उद्देश्य इन निकायों के समक्ष लंबित और जारी मामलों की जानकारी को एक केंद्रीय स्थान पर उपलब्ध कराना है।

इसी तरह काम करने वाला राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड भारतीय न्यायपालिका के सभी स्तरों पर मामलों की स्थिति, आदेशों, फैसलों और अन्य संबंधित जानकारियों का व्यापक और लगभग रियल-टाइम ऑनलाइन डेटाबेस है। इसका प्रबंधन उच्चतम न्यायालय की ई-कमेटी द्वारा किया जाता है।

संसद में दिए गए जवाबों के आधार पर लगाए गए अनुमानों के अनुसार, विभिन्न न्यायाधिकरणों में वर्तमान में 5.24 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।

इन अर्ध-न्यायिक निकायों की स्थापना मूल रूप से त्वरित न्याय प्रदान करने और अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, पिछले कई दशकों में इन निकायों के समक्ष लंबित मामलों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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