जमानत मिलने के एक दिन बाद अदालत ने दंगों के चार आरोपियों के जमानत बॉण्ड के सत्यापन का आदेश दिया

जमानत मिलने के एक दिन बाद अदालत ने दंगों के चार आरोपियों के जमानत बॉण्ड के सत्यापन का आदेश दिया

जमानत मिलने के एक दिन बाद अदालत ने दंगों के चार आरोपियों के जमानत बॉण्ड के सत्यापन का आदेश दिया
Modified Date: January 6, 2026 / 08:34 pm IST
Published Date: January 6, 2026 8:34 pm IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उच्चतम न्यायालय से जमानत प्राप्त करने वाले पांच आरोपियों में से चार द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और जमानतदारों के सत्यापन का आदेश दिया। इसके कारण उनकी रिहाई में एक दिन की देरी हुई है।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देते हुए 11 शर्तें लगाई थीं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान और मोहम्मद सलीम खान द्वारा प्रस्तुत दो-दो लाख रुपये के जमानत बॉण्ड और इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानती स्वीकार कर लिए और पुलिस को बुधवार तक दस्तावेजों का सत्यापन करने का निर्देश दिया।

 ⁠

पांचवां आरोपी शादाब अहमद जमानत बॉण्ड जमा करने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ।

हालांकि, अधिकतर आरोपियों को पूर्व में अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया था और उन्होंने उस समय जमानत बॉण्ड जमा कर दिए थे, लेकिन संबंधित मामले में अदालत ने एक दुर्लभ आदेश में बॉण्ड के सत्यापन का निर्देश दिया, जिससे उनकी रिहाई में एक दिन की देरी हुई है।

दस्तावेज़ों के सत्यापन की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए, मीरान हैदर के वकील एम एन खान ने तर्क दिया कि जमानत बॉण्ड जमा करने वाला व्यक्ति उनके मुवक्किल का रिश्तेदार है और उसी घर में रहता है।

इसके बाद अदालत ने मामले में अगली कार्यवाही सात जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी।

सोमवार को, उच्चतम न्यायालय ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अन्य पांच आरोपियों को जमानत दे दी थी। इसने दंगों में ‘‘संलिप्तता के पदानुक्रम’’ का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत खालिद और इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

भाषा

नेत्रपाल वैभव

वैभव


लेखक के बारे में