नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता के दीदार के लिए बनी अनूठी गैलरी

नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता के दीदार के लिए बनी अनूठी गैलरी

नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता के दीदार के लिए बनी अनूठी गैलरी
Modified Date: April 13, 2026 / 10:55 pm IST
Published Date: April 13, 2026 10:55 pm IST

हल्द्वानी, 13 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में आने वाले पर्यटक अब एक अनूठी गैलरी के माध्यम से इसकी समृद्ध जैव विविधता का दीदार कर सकते हैं जिसका उद्देश्य इको-टूरिज्म को मजबूत करना और प्रकृति प्रेमियों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अभयारण्य का नाम इससे होकर बहने वाली करीब 30 किलोमीटर लंबी नंधौर नदी के नाम पर रखा गया है। नंधौर उत्तराखंड का सबसे नया वन्यजीव अभयारण्य है जिसे 2012 में अधिसूचित किया गया था।

कुल 269 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य कुमाऊं वन क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे मशहूर शिकारी और वन्यजीव प्रेमी जिम कॉर्बेट की पुस्तकों से खासी प्रसिद्धि मिली।

हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) कुंदन कुमार ने बताया, “नंधौर जैव विविधता गैलरी को हल्द्वानी वन प्रभाग द्वारा क्षेत्र में संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देने और इको-टूरिज्म को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के रूप में नंधौर अभयारण्य के चोरगलिया और काकाराली गेट पर विकसित किया गया है।”

नवीनतम बाघ गणना के अनुसार, समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं के अलावा, इस वन प्रभाग में 37 बाघ पाए गए हैं।

कुमार ने कहा, ‘नंधौर वन्यजीव अभयारण्य उत्तराखंड के सबसे अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। लेकिन, इसका अधिकांश हिस्सा आगंतुकों की नजरों में नहीं आ पाता। यह गैलरी इस जैव विविधता को समझने के लिए एक आकर्षक मंच प्रदान करती है, जिससे यह उन लोगों के लिए भी सुलभ हो जाती है जो अपनी यात्रा के दौरान वन्यजीवों को नहीं देख पाते।”

भारतीय वन सेवा के 2017 बैच के अधिकारी कुमार ने कहा कि इस गैलरी को अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता को प्रदर्शित करने के लिए जानकारी परक और आकर्षक स्थान के रूप में डिजाइन किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसमें नंधौर में पाए जाने वाले स्तनधारियों, पक्षियों, तितलियों, सरीसृपों और अन्य जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों को प्रदर्शित करने वाले उच्च गुणवत्ता के पैनल लगे हैं।

कुमार ने कहा कि गैलरी की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘ऐतिहासिक खंड’ है जिसमें क्षेत्र में वन प्रबंधन की विरासत को दर्शाने वाली दुर्लभ और चुनिंदा अभिलेखीय सामग्री रखी गयी है।

उन्होंने कहा कि इस खंड में पुराने वन विश्राम गृहों की तस्वीरें शामिल हैं जो स्थापत्य विरासत और वन प्रशासन की ऐतिहासिक उपस्थिति को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें ‘नंधौर ट्रामवे प्रणाली’ का दृश्य दस्तावेजीकरण भी शामिल है, जिसका ऐतिहासिक रूप से लकड़ी निकालने और परिवहन के लिए उपयोग किया जाता था।

भाषा दीप्ति

जोहेब

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