ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्तावित नोटिस का समर्थन करने पर आप, द्रमुक सहमत: सूत्र
ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्तावित नोटिस का समर्थन करने पर आप, द्रमुक सहमत: सूत्र
नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा तैयार किये जा रहे नोटिस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गए हैं।
नोटिस पर हस्ताक्षर करने के लिए दोनों दलों के सहमत होने से जुड़ा यह घटनाक्रम आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कुमार के खिलाफ विपक्ष में बढ़ते तालमेल के बीच हुआ है।
पूर्व में, आप और द्रमुक, दोनों दलों ने ‘इंडिया’ गठबंधन से दूरी बना ली थी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी ने रविवार को आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की, जबकि तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने मंगलवार सुबह आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह से मुलाकात की।
विपक्षी नेताओं द्वारा नये नोटिस के लिए अधिक समर्थन जुटाने की कोशिश के तहत ऐसा किया गया।
इससे पहले, द्रमुक सांसद कनिमोई ने भी 17 सितंबर को कोलकाता में तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की थी।
सूत्रों के मुताबिक, आप और द्रमुक दोनों ही सीईसी कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष के प्रस्तावित नोटिस का समर्थन करने पर सहमत हो गए हैं।
दिल्ली और पंजाब में चुनावों को लेकर कांग्रेस के साथ रिश्ते खराब होने के बाद, आप जुलाई 2025 में औपचारिक रूप से ‘इंडिया’ गठबंधन से बाहर हो गई थी।
दोनों पार्टियों ने दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में 2024 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन पंजाब में वे एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बनी रहीं। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव अपने-अपने बूते लड़ने के बाद उनके बीच मतभेद और बढ़ गए।
इस साल हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद द्रमुक और कांग्रेस के रिश्ते टूट गए, क्योंकि चुनाव के बाद कांग्रेस ने अभिनेता-नेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) को समर्थन दे दिया।
द्रमुक ने इस कदम को विश्वासघात बताया और इसके बाद जून में हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से दूर रही। द्रमुक नेताओं का कहना था कि पार्टी विपक्ष का हिस्सा तो बनी हुई है, लेकिन अब वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
‘इंडिया’ गठबंधन से दूरी बनाने के बावजूद आप और द्रमुक, दोनों ही दल विशेष मुद्दों, खासकर निर्वाचन आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के साथ तालमेल बनाए हुए हैं। दोनों दलों ने 28 जून को भारत के प्रधान न्यायाधीश को लिखे एक पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें आयोग के कामकाज और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी पार्टियां अगले कुछ दिनों में लोकसभा और राज्यसभा में, सीईसी कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए नया नोटिस देने की तैयारी कर रही हैं।
कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की विपक्ष की यह तीसरी कोशिश होगी।
नोटिस तैयार किया जा रहा है और संसद के दोनों सदनों में दिये जाने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जाएगी।
मार्च में, कुमार को पद से हटाने की मांग संबंधी नोटिस दोनों सदनों में दिये गए थे। दोनों ही नोटिस खारिज कर दिये गए थे। इसके बाद, विपक्ष ने अप्रैल में राज्यसभा में एक नया नोटिस दिया था, जिसमें कुमार को पद से हटाने के लिए नौ आधार बताए गए थे।
हाल में, अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार एसआईआर प्रक्रिया और अन्य मामलों से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी।
इस रिपोर्ट ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी दल कुमार को सीईसी के पद से हटाने की फिर से मांग कर रहे हैं।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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