अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से राहत

अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से राहत

अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से राहत
Modified Date: May 21, 2026 / 07:06 pm IST
Published Date: May 21, 2026 7:06 pm IST

कोलकाता, 21 मई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को पिछले महीने एक जनसभा में दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज प्राथमिकी में 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया।

न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी सांसद के लिए इस तरह के अनुचित बयान देना सही है।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा पेश होने के लिए भेजे गए नोटिस का अनुपालन करने का निर्देश दिया।

अदालत ने उन्हें न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करने का भी निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करता है, तो एजेंसी को इस न्यायालय में आने की स्वतंत्रता होगी।

अदालत ने निर्देश दिया कि बनर्जी को पेशी के लिए 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाएगा।

डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उस प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को एक जनसभा में प्रतिद्वंद्वी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज की गई थी।

बनर्जी द्वारा ‘‘गैर-जिम्मेदाराना बयान’’ दिए जाने पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अगर तृणमूल चुनाव जीत जाती तो क्या होता।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘इस राज्य का चुनाव के बाद हिंसा का पुराना इतिहास रहा है।’’

अदालत ने कहा कि बनर्जी की टिप्पणियां समाचार चैनलों में दिखाई गईं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुईं। न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक सभा में उनकी टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव और लोकसभा सांसद के पद के अनुरूप थीं?

उनके वकील कल्याण बनर्जी ने जवाब दिया, ‘‘ शायद नहीं, लेकिन सवाल यह है कि भाषण का कोई प्रभाव पड़ा या नहीं।’’ कल्याण बनर्जी भी तृणमूल के सांसद हैं।

अदालत ने उन्हें 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देते हुए कहा कि वह 20 जुलाई को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगी।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध किया, लेकिन यह भी कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

शिकायतकर्ता ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल को आरामबाग में और 25 मार्च को नंदीग्राम में आयोजित जनसभाओं के दौरान खुलेआम चुनौती दी और भड़काऊ बयान दिए, जिससे सार्वजनिक सद्भाव को नुकसान पहुंच सकता था।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


लेखक के बारे में