तृणमूल मामले में बिरला से मिले अभिषेक बनर्जी, बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की

तृणमूल मामले में बिरला से मिले अभिषेक बनर्जी, बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की

तृणमूल मामले में बिरला से मिले अभिषेक बनर्जी, बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की
Modified Date: June 19, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: June 19, 2026 8:21 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की।

उन्होंने इन 20 लोकसभा सदस्यों के विरूद्ध बिरला को 20 याचिकाएं सौंपीं और संविधान की 10वीं अनुसूची और उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कदम उठाने का आग्रह किया।

बनर्जी ने उम्मीद जताई कि बिरला संविधान के मुताबिक काम करेंगे और संविधान का गला नहीं घोटेंगे।

तृणमूल से बगावत करने वाले 20 सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय करने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा बनने की घोषणा की है।

बिरला से मुलाकात के बाद बनर्जी ने संसद परिसर में संवादाताओं से कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय संसदीय दल या विधायक दल की संख्या के आधार पर नहीं होता है, बल्कि इसके लिए जरूरी है कि पूरी पार्टी का दो-तिहाई विलय हो।

बनर्जी ने कहा, ‘‘20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की। बाद में हमें पता चला कि इन सांसदों ने एनसीपीआई नाम की दूसरी पार्टी में शामिल होने का दावा किया है। किसी ने इस पार्टी का नाम नहीं सुना था। यहां तक कि इन सांसदों ने भी पहले इसका नाम नहीं सुना था।’’

उन्होंने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद के रूप में अयोग्य हो जाता है।

उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतता है और दो साल बाद कहता है कि वह दूसरी पार्टी में शामिल हो रहा है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी आधार पर मैंने तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा नेता के रूप में इन 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग 20 अयोग्यता याचिकाएं दी हैं।’’

बनर्जी ने कहा, ‘‘लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि मैं दूसरे पक्ष को सुनूंगा और फिर आपको बुलाऊंगा।’’

उनका कहना था, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि लोकसभा अध्यक्ष संविधान के हिसाब से काम करेंगे और संविधान का गला नहीं घोटेंगे।’’

तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘अगर आपको (बागियों) तृणमूल से दिक्कत है तो सदस्यता से इस्तीफा दीजिए और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़िए।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने इन 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों की मांग पर फैसला लेने से पहले बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था।

इन सांसदों ने एनसीपीआई में विलय के बाद खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

बनर्जी ने पिछले सप्ताह भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए।

उन्होंने कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देते।

भाषा हक हक पवनेश

पवनेश


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