मरीज को अवधि समाप्ति वाली ‘सलाइन’ चढ़ाने का आरोप, बंगाल सरकार ने जांच के आदेश दिए

मरीज को अवधि समाप्ति वाली 'सलाइन' चढ़ाने का आरोप, बंगाल सरकार ने जांच के आदेश दिए

मरीज को अवधि समाप्ति वाली ‘सलाइन’ चढ़ाने का आरोप, बंगाल सरकार ने जांच के आदेश दिए
Modified Date: July 9, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: July 9, 2026 3:42 pm IST

कोलकाता, नौ जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल में एक मरीज के परिजनों द्वारा उसे (मरीज को) एक सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपयोग की अवधि समाप्ति वाली सलाइन चढ़ाए जाने का आरोप लगाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बृहस्पतिवार को मामले की जांच के आदेश दिए।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और कड़ा करने की घोषणा की।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी ने कहा कि इस संबंध में मिदनापुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से रिपोर्ट तलब की गई है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जनवरी 2025 में भी इस मेडिकल संस्थान में एक मरीज को कथित तौर पर उपयोग की अवधि समाप्ति वाला सलाइन चढ़ाए जाने को लेकर विवाद हुआ था।

मुखर्जी ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य अधिकारियों से मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन किए जाने की अपेक्षा की जाती है और विभाग इसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा। ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए साप्ताहिक जांच की जाएगी।’’

मरीज की पहचान मिदनापुर शहर के विद्यासागरपल्ली निवासी मानसी डे के रूप में हुई है। उन्हें स्ट्रोक आने के बाद पांच जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

परिजनों के अनुसार, आठ जुलाई को अंतःशिरा लवणीय घोल (आईवी सलाइन) चढ़ाए जाने के दौरान उन्होंने सीने में जलन की शिकायत की। उनके बेटे का आरोप है कि बोतल की जांच करने पर उस पर समाप्ति तिथि इस वर्ष मार्च अंकित थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी मां को स्ट्रोक के अलावा कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हैं। मैं जानना चाहता हूं कि उन्हें ऐसी सलाइन कैसे चढ़ा दी गई।’’

इसके बाद मरीज को गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया और अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी।

चिकित्सा अधीक्षक एवं उप-प्राचार्य इंद्रनील सेन ने कहा कि मरीज की हालत स्थिर है और उस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सेन ने कहा, ‘‘अस्पताल में दवाओं का भंडारण किया जाता है और संभवत: किसी तरह ‘एक्सपायरी’ सलाइन मरीज को चढ़ा दी गई। इस चूक का तुरंत पता चल गया और उसे सुधार लिया गया। मरीज को क्रिटिकल केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया है।’’

भाषा अमित पवनेश

पवनेश


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