न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद गुरुग्राम के चक्करपुर में अनधिकृत दुकानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू
न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद गुरुग्राम के चक्करपुर में अनधिकृत दुकानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू
गुरुग्राम, 27 मई (भाषा) गुरुग्राम में सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध ढांचों के खिलाफ अभियान चलाने के बाद जिला प्रशासन ने अब चक्करपुर गांव में लाइसेंसी कॉलोनी की जमीन पर कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित दुकानों और व्यावसायिक ढांचों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन), गुरुग्राम द्वारा सोमवार को जारी आदेश में भू-स्वामियों दलबीर सिंह और चरण सिंह के साथ-साथ राजदरबार आइकॉनिक वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को 15 दिन के भीतर कथित उल्लंघनों को हटाकर जमीन को मूल स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश में कहा गया है कि ऐसा नहीं करने पर हरियाणा शहरी क्षेत्रों के विकास और विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 10 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई इस महीने की शुरुआत में विवादित भूमि से संबंधित अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों के बाद हुई है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि निजी पक्षों के बीच मध्यस्थता कार्यवाही कथित रूप से अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई को रोक नहीं सकती और जिला नगर नियोजन (डीटीसीपी) विभाग को एचडीआरयूए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
मध्यस्थता कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले अपीलीय प्राधिकरण द्वारा दी गई राहत पर सवाल उठाते हुए न्यायालय ने कहा कि मध्यस्थ न्यायाधिकरण केवल भूमि पर प्रतिस्पर्धी दावों की जांच कर रहा था, न कि उस पर कथित रूप से निर्मित संरचनाओं की वैधता की।
इसके बाद पीठ ने जिला नगर योजनाकार को कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया और मध्यस्थता कार्यवाही को शीघ्र समाप्त करने का अनुरोध किया।
डीटीसीपी का आदेश चक्कपुर गांव में लाइसेंस संख्या 85/2004 के अंतर्गत आने वाली भूमि से संबंधित है, जहां अधिकारियों ने आरोप लगाया कि ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, कैफे, खुदरा दुकानें और सामग्री भंडार सहित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना स्वीकृत भवन योजनाओं या वैधानिक अनुमतियों के संचालित हो रहे थे।
विभाग के अनुसार, व्यावसायिक कॉलोनी के विकास का लाइसेंस जुलाई 2006 में समाप्त हो गया था और उस स्थान के लिए कभी भी कोई भवन योजना स्वीकृत नहीं की गई थी।
अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि लाइसेंस प्राप्त भूमि पर एचडीआरयूए अधिनियम की धारा 3बी का उल्लंघन करते हुए अनधिकृत निर्माण जारी हैं।
यह विवाद लगभग दो दशकों से जारी है और इसमें भूमि अधिग्रहण, विनिमय विलेख, मध्यस्थता कार्यवाही और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में कई मामले शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि भूमि के कुछ हिस्से एचएसवीपी द्वारा अधिग्रहित किए गए थे और बाद में 2003 में क्रिसम प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ उनका विनिमय किया गया था, जिसके बाद हितधारकों के बीच कानूनी विवाद जारी रहे।
अधिकारियों ने बताया कि कथित अनधिकृत निर्माण के संबंध में शिकायतों के कारण 2021 से बार-बार कारण बताओ नोटिस और बहाली आदेश जारी किए गए, साथ ही अप्रैल 2023 में एक विध्वंस अभियान भी चलाया गया।
पक्षों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए, डीटीसीपी ने कहा कि मध्यस्थता कार्यवाही, दीवानी अपील या रिट याचिकाओं के लंबित होने से वैधानिक कार्रवाई स्वतः ही बाधित नहीं होती है, जब तक कि अधिकारियों को कानून के तहत कार्यवाही करने से रोकने वाला कोई स्पष्ट स्थगन आदेश न हो।
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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