एडीएजी कथित बैंक धोखाधड़ी मामला : न्यायालय में जनहित याचिका पर अब आठ मई को सुनवाई
एडीएजी कथित बैंक धोखाधड़ी मामला : न्यायालय में जनहित याचिका पर अब आठ मई को सुनवाई
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई आठ मई तक के लिए स्थगित कर दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ पूर्व नौकरशाह ई ए एस शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अनिल अंबानी की अगुवाई वाले अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
मामले की सुनवाई के शुरू में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस मामले में 23 मार्च को जारी निर्देशों के अनुसरण में नई वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल की हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा,‘‘ सीबीआई और ईडी ने वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इसके सूत्रधार को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। अनिल अंबानी को मुख्य आरोपी के रूप में पहचाना गया है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है।’’
इस पर सॉलिस्टर जनरल ने कहा, ‘‘मैं इस बात का जवाब नहीं दे सकता कि ‘फलां’ या ‘फलां’ व्यक्ति को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है। हमने अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है।’’
अनिल अंबानी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से उन्हें आधे घंटे की सुनवाई का समय देने का आग्रह किया क्योंकि उनके पास कुछ ऐसा कहना है जो अभी तक किसी भी अदालत को नहीं बताया गया है।
सिब्बल के अनुरोध पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ वस्तु स्थिति रिपोर्ट पर संज्ञान लेने से पहले हम आपका पक्ष भी सुनेंगे।’’ उन्होंने साथ ही कहा कि अदालत ने जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आदेश दिये हैं।
इससे पहले, पीठ ने एडीएजी और उससे जुड़ी कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी मामले की जांच में सीबीआई और ईडी द्वारा दिखाए गए ढीले ढाले रवैये पर असंतोष व्यक्त किया था।
पीठ ने सीबीआई और ईडी को इस मामले की ‘‘निष्पक्ष, तटस्थ, पारदर्शी और समयबद्ध’’ जांच करने का निर्देश दिया था।
शीर्ष अदालत ने संबंधित सभी वित्तीय संस्थानों को ‘ईडी को पूर्ण सहयोग प्रदान करने’ का निर्देश भी दिया।
इसने केंद्रीय जांच एजेंसियों को यह अनुमति भी दी कि यदि अन्य सरकारी निकाय उन्हें सहयोग देने में अनिच्छा जताते हैं तो वे उससे संपर्क कर सकते हैं।
मेहता ने पीठ को सूचित किया कि एक पूर्व आदेश के अनुसरण में, वरिष्ठ ईडी अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र के वित्तीय विशेषज्ञों को मिलाकर एक एसआईटी का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने अब तक 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
पीठ ने जांच एजेंसियों की ताजा वस्तु स्थिति रिपोर्ट में सामने आए कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि सीबीआई और ईडी वर्तमान में क्रमशः सात और आठ प्राथमिकी की जांच कर रही हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण राशि का निपटारा, ज़ाहिर तौर पर 26 करोड़ रुपये का भुगतान करके कर दिया गया है।
पीठ ने कहा कि अनुमान है कि धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 73,000 करोड़ रुपये है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जांच एजेंसियों को मिलकर इस मामले का हल निकालना चाहिए। हम सीबीआई और ईडी को निर्देश देते हैं कि जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से पूरा किया जाए ताकि इसे समयबद्ध तरीके से तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया है कि सच्चाई का पता लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सॉलिसिटर जनरल ने ईडी की दूसरी वस्तुस्थिति रिपोर्ट का हवाला दिया है जिसमें वित्तीय संस्थानों से विवरण मांगे गए हैं। हम अनुरोध को पूर्णतः स्वीकार करते हैं।’’
याचिकाकर्ता ने अंबानी के देश छोड़कर भाग जाने की आशंका जताई थी, जिसपर उन्होंने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि वह उसकी पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
ईडी ने ‘‘सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग’’ का हवाला देते हुए रिलायंस होम फाइनेंस में 7,500 करोड़ रुपये और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में 8,200 करोड़ रुपये की ऋण चूक का आरोप लगाया है।
रिलायंस पावर के संबंध में ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को जाली बैंक गारंटी जमा करने की जांच कर रही है, जिससे 105 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उसने यह रिपोर्ट अदालत के रिकॉर्ड पर दर्ज करायी है।
उच्चतम न्यायालय ने 23 जनवरी को सीबीआई और ईडी को कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की जांच पर 10 दिनों के भीतर सीलबंद लिफाफे में वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।
याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी 2025 में दर्ज की गई थी, जबकि धोखाधड़ी 2007-08 से चल रही थी।
जनहित याचिका में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस एडीएजी की कई संस्थाओं में सार्वजनिक धन के व्यवस्थित दुरुपयोग, वित्तीय विवरणों में हेराफेरी और संस्थागत मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी, साथ ही उससे जुड़ी ईडी की कार्रवाई, बड़े घोटाले के छोटे हिस्से के बारे में है।
जनहित याचिका में प्रतिवादियों (सरकार) को सीबीआई और ईडी के अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया ताकि गहन, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की जा सके।
इसमें कहा गया है कि 2013 और 2017 के बीच, आरकॉम, रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से 31,580 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
भाषा
धीरज नरेश
नरेश

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