हमले के बाद असम कांग्रेस ने नगांव के जिला निर्वाचन अधिकारी को हटाने की मांग की

हमले के बाद असम कांग्रेस ने नगांव के जिला निर्वाचन अधिकारी को हटाने की मांग की

हमले के बाद असम कांग्रेस ने नगांव के जिला निर्वाचन अधिकारी को हटाने की मांग की
Modified Date: September 23, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: September 23, 2026 7:09 pm IST

गुवाहाटी, 23 सितंबर (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई ने इस सप्ताह की शुरुआत में पार्टी नेताओं के काफिले पर हुए कथित हमले के बाद लोकसभा उपचुनाव “स्वतंत्र और निष्पक्ष” ढंग से संपन्न कराने के लिए बुधवार को निर्वाचन आयोग (ईसी) से नगांव जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को हटाने का आग्रह किया है।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने डीईओ कार्यालय द्वारा एक पत्र में इस हमले को “अचानक और पूरी तरह से अप्रत्याशित घटना” बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

कांग्रेस ने कहा कि यह हमला सोमवार को नगांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान हुआ और जिला आयुक्त-सह-जिला निर्वाचन अधिकारी को इस हमले के लिए की जा रही कथित तैयारियों के बारे में काफी पहले ही सूचित कर दिया गया था।

प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बिपुल गोगोई ने निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कहा, “डीईओ द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित प्रेस नोट में हमले को अचानक और पूरी तरह से अप्रत्याशित घटना बताया गया है, जो कि संभव नहीं है। घटना अचानक नहीं हुई थी और प्रशासन को पहले से ही बार-बार इस लेकर आगाह किया गया था।”

गोगोई ने कहा कि धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन ने नगांव के उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन अधिकारी को बार-बार सूचित और सतर्क किया था कि भाजपा समर्थित असामाजिक तत्व बोरोमा बाजार में संभावित सभा और हमले की तैयारी कर रहे थे तथा पत्थर और अन्य सामग्री जुटा रहे थे।

उन्होंने बताया कि इसके बाद जिला आयुक्त ने कांग्रेस नेता को चिंता नहीं करने के लिए कहा और दावा किया था कि “सभी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं”।

उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में पूर्व सूचना के बाद में हुए हमले को महज ‘अचानक हुई झड़प’ बताना गंभीर चिंता का विषय है और इसकी स्वतंत्र जांच की जरूरत है। जरूरत पड़ने पर हुसैन का ‘कॉल रिकॉर्ड’ आयोग के साथ साझा किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन वरिष्ठ अधिकारियों को कितनी बार और कब-कब फोन किया गया था।”

गोगोई ने पत्र में कहा, “कांग्रेस ने आयोग से अनुरोध किया है कि वह इस मामले को ‘अत्यावश्यक और संवेदनशील’ मानते हुए घटना के कारणों का स्वतंत्र मूल्यांकन करे और यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपाय करे कि शेष चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष, तटस्थ और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।”

भाषा प्रचेता प्रशांत

प्रशांत


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