उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को भोजशाला में ‘महा आरती’ हुई

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को भोजशाला में 'महा आरती' हुई

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को भोजशाला में ‘महा आरती’ हुई
Modified Date: May 22, 2026 / 07:47 pm IST
Published Date: May 22, 2026 7:47 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

धार, 22 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला परिसर को उच्च न्यायालय द्वारा मंदिर घोषित किए जाने के एक सप्ताह बाद शुक्रवार को सैकड़ों हिंदू श्रद्धालुओं ने वहां ‘महा आरती’ में भाग लिया, जबकि मुसलमानों ने इस फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर अपने घरों में नमाज अदा की।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को अपने फैसले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर करार दिया था और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस आदेश को निरस्त कर दिया था जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को वहां नमाज अदा करने की अनुमति थी।

इस फैसले से पहले हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार को इस मध्यकालीन स्मारक में पूजा की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से यहां शुक्रवार की नमाज अदा करता आ रहा था। दोनों समुदाय इस स्थल पर अपना अधिकार जताते रहे हैं।

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह पहला जुम्मा था। हिंदू संगठनों ने इसे दो दशक से अधिक समय बाद परिसर में शुक्रवार को बड़े स्तर पर हुआ पहला धार्मिक आयोजन बताया।

भोज उत्सव समिति और भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति ने परिसर में भजन-कीर्तन, धार्मिक कार्यक्रम और ‘महा आरती’ का आयोजन किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा।

भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि धार और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

परिसर के गर्भगृह और अन्य हिस्सों को रंगोली एवं फूलों से सजाया गया था तथा श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए कतारों में नजर आए।

हालांकि मुसलमानों ने उच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर अपने घरों और निजी परिसरों में जुमे की नमाज अदा की।

स्थानीय मुस्लिम नेता अब्दुल समद ने कहा कि समुदाय उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करता है, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराया। हमने अपने घरों में जुमे की नमाज अदा की और काली पट्टी बांधी।’’

समद ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका उच्चतम न्यायालय में दायर की गई है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने परिसर के कमाल मौला मस्जिद हिस्से में शुक्रवार की नमाज की अनुमति रद्द किए जाने पर भी आपत्ति जताई।

इससे पहले समद ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में प्रशासन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि भोजशाला परिसर के आसपास की कुछ गतिविधियां उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं थीं।

उन्होंने प्रशासन द्वारा कुछ कार्यक्रमों और अनुमतियों को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली।

समद ने कहा, ‘‘संविधान सभी समुदायों को समान धार्मिक स्वतंत्रता देता है और हम उसके दायरे में रहकर आगे भी कार्य करेंगे।’’

संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने धार में करीब 2,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी निगरानी, वाहन जांच और मोबाइल गश्त भी की गई।

धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों का ‘‘अक्षरश: पालन’’ किया गया और जिले में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने विगत शुक्रवार को भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया था, जिसके अगले ही दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए स्मारक में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दे दी थी।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने अपने फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

ग्यारहवीं शताब्दी के इस स्मारक की धार्मिक प्रकृति को लेकर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ था जब मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद बताया, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यहां परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया।

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहले मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पूजा- अर्चना की थी।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना की, हनुमान चालीसा का पाठ किया, मिठाइयां बांटी, पटाखे छोड़े, शंख बजाए और हवन कीर्तन भी किया।

भाषा सं दिमो राजकुमार

राजकुमार


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