सरगना की हत्या के बाद जाली नोट से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार

सरगना की हत्या के बाद जाली नोट से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार

सरगना की हत्या के बाद जाली नोट से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार
Modified Date: June 6, 2026 / 11:23 pm IST
Published Date: June 6, 2026 11:23 pm IST

अहमदाबाद, छह जून (भाषा) अहमदाबाद पुलिस ने हत्या की जांच के दौरान नकली नोटों से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़ करके 28.9 लाख रुपये अंकित मूल्य के जाली नोट बरामद किए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी और कहा कि पुलिस ने इस सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है और उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।

जोन-8 के पुलिस उपायुक्त मयूर पाटिल ने कहा, ‘गिरोह का सातवां आरोपी और सरगना मर चुका है।’

उन्होंने बताया कि मामले में पांच वयस्क आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, शहर में हुई एक हत्या की जांच के दौरान नकली नोट से जुड़े गिरोह के बारे में पता चला।

पाटिल ने बताया कि 27 मई को पुलिस को वटवा क्षेत्र स्थित एक फ्लैट से गिरोह के सरगना इमरान सिंधा का शव पाया गया था। आरोप है कि उसके साथ मिलकर नकली नोट तैयार करने वाले सहयोगियों ने ही उसकी हत्या कर दी।

पुलिस के मुताबिक, सिंधा छोटी-छोटी बातों पर अपने साथियों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार करता था। उसके व्यवहार से परेशान होकर आरोपियों ने कथित तौर पर उसकी पिटाई की, उसे फ्लैट के भीतर बांध दिया और वहां से नकली नोट तथा उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें लेकर फरार हो गए।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके बाद गिरोह के सदस्यों को विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से 28.94 लाख रुपये अंकित मूल्य के जाली नोट, एक लैपटॉप और कई प्रिंटर बरामद किए गए हैं।

पुलिस उपायुक्त मयूर पाटिल ने कहा कि तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर बनासकांठा निवासी मेराज रबारी को भी गिरफ्तार किया गया। वह इस मामले का छठा आरोपी है और कथित रूप से जाली नोटों के वितरण में शामिल था।

उन्होंने बताया कि इस मामले में नाबालिग आरोपी और मृतक इमरान सिंधा सहित कुल सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामदगी से इतर अन्य जाली नोटों को किस प्रकार और किन माध्यमों से बाजार में खपाया गया।

भाषा

राखी संतोष

संतोष


लेखक के बारे में