Trinmool Congress Major Reshuffle: ममता ने कतरे अपने ही भतीजे अभिषेक के पर!.. पद से नहीं हटाया पर शुरू कर दी कामकाज की निगरानी.. विद्रोह के बीच TMC में बड़ा बदलाव..

All India Trinmool Congress Major Reshuffle: टीएमसी में बड़े फेरबदल के बीच अभिषेक बरकरार, लेकिन संगठन संचालन के लिए दो संयुक्त महासचिव नियुक्त किए गए।

Trinmool Congress Major Reshuffle: ममता ने कतरे अपने ही भतीजे अभिषेक के पर!.. पद से नहीं हटाया पर शुरू कर दी कामकाज की निगरानी.. विद्रोह के बीच TMC में बड़ा बदलाव..

Trinmool Congress Major Reshuffle || Image- AI Generated File

Modified Date: June 6, 2026 / 08:44 pm IST
Published Date: June 6, 2026 8:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • अभिषेक बनर्जी के साथ दो संयुक्त महासचिव नियुक्त किए गए।
  • पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच संगठनात्मक बदलाव हुआ।
  • ममता बनर्जी ने नियंत्रण और संतुलन का स्पष्ट संदेश दिया।

कोलकाता: चुनावी हार और पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह बीच टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। (Trinmool Congress Major Reshuffle) उन्होंने अपने भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को पद पर तो बरकरार रखा, लेकिन उनके साथ दो संयुक्त महासचिव नियुक्त कर संगठन में शक्ति संतुलन का पैगाम दिया है। दरअसल टीएमसी द्वारा घोषित नए संगठनात्मक ढांचे के तहत डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त महासचिव बनाया है। पार्टी का कहना है कि दोनों नेता संगठन संचालन में अभिषेक की मदद करेंगे।

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हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अभिषेक बनर्जी के पर काटने के संकेत है। डोला सेन को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है और उनकी नियुक्ति को पार्टी के केंद्रीय संगठन में ममता की सीधी निगरानी के रूप में देखा जा रहा है।

बगावत और विवादों के बीच आया फैसला

टीएमसी हाल के समय में गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। विपक्ष के नेता ऋतब्रता बनर्जी और कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोला था। विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए। (Trinmool Congress Major Reshuffle) आरोप है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षर बिना अनुमति के जोड़े गए थे। इस मामले में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर जांच भी चल रही है। रितब्रत बनर्जी ने अभिषेक को फिर से महत्वपूर्ण पद देने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस नेतृत्व में पार्टी जमीनी स्तर पर कमजोर हुई, उस पर दोबारा भरोसा करना कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत है।

चुनावी हार का ठीकरा अभिषेक पर

चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि उन्होंने राजनीतिक रणनीतिकारों और सलाहकारों के जरिए समानांतर संगठन खड़ा कर लिया था, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका कमजोर हुई। काकोली घोष दस्तीदार समेत कई नेताओं ने चुनावी रणनीति और संगठन संचालन को हार का बड़ा कारण बताया। वहीं कुछ नेताओं का आरोप है कि उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ प्रबंधन तक अधिकांश फैसलों पर अभिषेक की छाप थी।

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ममता ने दिया नियंत्रण का संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी ने अभिषेक को पूरी तरह किनारे करने के बजाय उनकी शक्तियों को सीमित कर सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था बनाई है। (Trinmool Congress Major Reshuffle) इससे एक ओर पार्टी में संतुलन बनाए रखने की कोशिश हुई है, वहीं दूसरी तरफ ममता ने यह संकेत भी दिया है कि अंतिम नियंत्रण अब भी उनके हाथ में है।

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