एयर इंडिया विमान दुर्घटना के बाद अहमदाबाद दमकल कर्मियों ने लड़ी सबसे कठिन लड़ाई

एयर इंडिया विमान दुर्घटना के बाद अहमदाबाद दमकल कर्मियों ने लड़ी सबसे कठिन लड़ाई

एयर इंडिया विमान दुर्घटना के बाद अहमदाबाद दमकल कर्मियों ने लड़ी सबसे कठिन लड़ाई
Modified Date: June 12, 2026 / 11:47 am IST
Published Date: June 12, 2026 11:47 am IST

अहमदाबाद, 12 जून (भाषा) आज से ठीक एक साल पहले, दोपहर में अहमदाबाद के आसमान में घना धुआं छा गया था, जब लंदन जा रहा एयर इंडिया का एक विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट दुर्घटनाग्रस्त होकर आग के गोले में तब्दील हो गया। विमान में बड़ी मात्रा में विमानन ईंधन होने के कारण तापमान लगभग 1,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

अहमदाबाद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमित डोंगरे के लिए यह किसी दु:स्वप्न से कम नहीं था। पदभार संभालने के महज तीन महीने बाद उन्हें और उनकी टीम को लगभग 10 घंटे तक चले एक बड़े बचाव अभियान का नेतृत्व करना पड़ा, जिसने उनके प्रशिक्षण और धैर्य दोनों की परीक्षा ली।

दुर्घटना के एक वर्ष बाद उस दिन को याद करते हुए डोंगरे ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा कि यह अभियान उनके 22 वर्ष से अधिक लंबे करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण घटनाओं में से एक था।

उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली और मुंबई अग्निशमन सेवाओं में कार्य करते हुए मैंने ऊंची इमारतों और झुग्गी बस्तियों से जुड़ी अनेक आपात स्थितियों का सामना किया है, लेकिन इस तरह की घटना पहली बार देखी।’’

दुर्घटनास्थल का दृश्य भयावह था। विमान के मलबे से आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा था, कई वाहन आग की चपेट में थे और मेघाणीनगर क्षेत्र घने धुएं से ढका हुआ था। बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा हो गए थे, जबकि दमकल कर्मी आग की लपटों के बीच जीवित लोगों की तलाश कर रहे थे। इस दौरान एलपीजी सिलेंडरों में विस्फोट और जलते पेड़ों से भी खतरा बना हुआ था।

डोंगरे ने कहा कि पुलिस, हवाई अड्डा प्रशासन और एम्बुलेंस सेवाओं के साथ बेहतर समन्वय के कारण 28 लोगों को सुरक्षित बचाया जा सका।

उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई व्यक्ति पीछे न छूट जाए, बचाव दल ने प्रभावित इमारतों के हर हिस्से की चार-चार बार तलाशी ली।

गत वर्ष 12 जून को लंदन जा रही एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 अपराह्न 1.41 बजे अहमदाबाद हवाई अड्डे के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में हादसे के स्थल के पास स्थित एक चिकित्सा संस्थान में मौजूद 19 अन्य लोग भी शामिल थे। हादसे में केवल एक यात्री जीवित बचा था।

डोंगरे ने बताया कि उन्हें दोपहर 1.43 बजे जमालपुर स्थित कार्यालय में नियमित कार्य के दौरान विमान दुर्घटना की सूचना मिली थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें कॉल मिल रही थी और उसी दौरान हवाईअड्डा प्राधिकरण से हॉटलाइन पर भी दो-तीन कॉल आईं। सभी कॉल में बताया गया कि मेघाणीनगर के पास एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।’’

उन्होंने बताया कि शुरू में आशंका थी कि कोई छोटा प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ होगा, लेकिन कुछ ही समय में स्पष्ट हो गया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान थी।

डोंगरे ने कहा, ‘‘हमें यह भी जानकारी मिली कि विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इसका अर्थ था कि उसमें अधिकतम मात्रा में ईंधन मौजूद होगा और स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।’’

उन्होंने बताया कि विमान में लगभग 1.25 लाख लीटर अत्यधिक ज्वलनशील विमानन टरबाइन ईंधन था। हादसे के बाद उत्पन्न वाष्पीय विस्फोट से आग लग गई और तापमान 800 से 1,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

डोंगरे के अनुसार, घटनास्थल पर पहुंचने पर देखा कि विमान पूरी तरह बिखर चुका था और भीषण आग लगी हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत में हमें किसी जीवित व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन हमने तलाश जारी रखी। हमारी प्राथमिकता उन चार इमारतों से लोगों को निकालना था जो दुर्घटना से प्रभावित हुई थीं।’’

डोंगरे के अनुसार, धुआं अत्यधिक घना था और गर्मी असहनीय थी। इसलिए दमकल कर्मियों को अलग-अलग टीमों में बांटा गया। एक टीम आग बुझाने में लगी रही, जबकि अन्य टीमों ने पीछे के रास्तों से इमारतों में प्रवेश कर बचाव कार्य किया।

उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के दौरान सभी प्रभावित इमारतों तक पहुंच बनाकर 28 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

पुलिस ने आपातकालीन वाहनों की आवाजाही के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया, जबकि 108 एम्बुलेंस सेवा ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। स्वयंसेवकों और अन्य एजेंसियों ने भी अभियान में सहयोग किया।

डोंगरे ने कहा कि आग बुझाने का कार्य रात करीब आठ बजे तक चला, जबकि संपूर्ण अभियान आधी रात के बाद तक जारी रहा।

उन्होंने बताया कि संभावित विस्फोटों को रोकने के लिए आग की चपेट में आए वाहनों और एलपीजी सिलेंडरों को हटाया गया तथा जल रहे और सूखे पेड़ों को काटा गया।

डोंगरे ने कहा, ‘‘पूरे अभियान के दौरान हमारी टीमों ने प्रत्येक इमारत के हर हिस्से की चार बार तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए।’’

भाषा मनीषा शोभना

शोभना


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