एआई स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव ला रही, पर मानवीय सहानुभूति का कोई जोड़ नहीं : राष्ट्रपति मुर्मू

एआई स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव ला रही, पर मानवीय सहानुभूति का कोई जोड़ नहीं : राष्ट्रपति मुर्मू

एआई स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव ला रही, पर मानवीय सहानुभूति का कोई जोड़ नहीं : राष्ट्रपति मुर्मू
Modified Date: April 13, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: April 13, 2026 10:11 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

राजकोट, 13 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही तीव्र प्रगति चिकित्सा क्षेत्र को बदल रही है, लेकिन मरीज की देखभाल के मामले में मानवीय सहानुभूति का कोई जोड़ नहीं है।

राजकोट में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पहले दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं ने चिकित्सा जगत का चेहरा तेजी से बदल दिया है।”

उन्होंने युवा चिकित्सा पेशेवरों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल को बढ़ाने और बीमारियों का अधिक प्रभावी ढंग से इलाज करने के लिए इन नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार रहें।

मुर्मू ने हालांकि कहा कि ऐसी नयी तकनीकें “कभी भी मानवीय सहानुभूति की जगह नहीं ले सकतीं।”

उन्होंने कहा, “आपके सौम्य शब्द, आश्वस्त करने वाली एक मुस्कान और मरीज की चिंताओं को सुनने की तत्परता अक्सर अकेले दवा से कहीं अधिक असरदार साबित हो सकती है।”

मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के प्रति एक प्रतिबद्धता है।

उन्होंने कहा कि एम्स जैसे संस्थानों को अपनी भावी विकास योजनाओं को क्षेत्रीय स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के हिसाब से ढालना चाहिए।

राष्ट्रपति ने एम्स राजकोट के लिए स्थानीय स्वास्थ्य मुद्दों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह अपने प्रयासों को खास तौर पर ग्रामीण और आदिवासी आबादी वाले इलाकों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार तथा सिकल सेल एनीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों के इलाज पर केंद्रित करे।

मुर्मू ने भरोसा जताया कि एम्स राजकोट जनता को सुलभ, उच्च गुणवत्ता और कम लागत वाली तृतीयक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए ऐसे मुद्दों को अपनी अनुसंधान एवं सेवा प्राथमिकताओं में शामिल करेगा।

उन्होंने कहा कि देशभर में स्थित एम्स न केवल चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल में, बल्कि अनुसंधान और नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्होंने पूरे भारत में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने में योगदान दिया है।

मुर्मू ने कहा, “एम्स राजकोट अपेक्षाकृत नया संस्थान है। इसके सामने एक लंबा सफर है और इसे शिक्षा, अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवा वितरण में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और संसाधनों के इष्टतम इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए।”

उन्होंने इस बात को लेकर संतोष जाहिर किया कि संस्थान चिकित्सा सेवाओं, टेलीमेडिसिन और सामुदायिक सहभागिता पहलों के माध्यम से पहले से ही क्षेत्र में योगदान दे रहा है।

राष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों से कहा कि उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य के संरक्षक के रूप में सौंपी गई जिम्मेदारी की अहमियत को पहचानना चाहिए और समाज की ओर से डॉक्टरों में जताए गए भरोसे को बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आप जो सफेद कोट पहनते हैं, वह अपार विश्वास का प्रतीक है। इसे बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है।”

मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा के पेशे में न केवल वैज्ञानिक ज्ञान, बल्कि धैर्य, विनम्रता और संवेदनशीलता भी जरूरी है।

उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए छात्रों से खुद को पूरी तरह से सेवा के लिए समर्पित करने और उससे संतुष्टि हासिल करने का आग्रह किया।

मुर्मू ने कहा, “पेशेवर दक्षता अहम है, लेकिन नैतिक ईमानदारी उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि कुशल और सामाजिक रूप से संवेदनशील चिकित्सा पेशेवर सार्थक बदलाव ला सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

दीक्षांत समारोह के दौरान एम्स राजकोट में साल 2020 में प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस छात्रों के पहले समूह को डिग्री प्रदान की गई।

आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, कुल 49 छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री दी गई, जबकि एक छात्र को विषाणु विज्ञान में पोस्ट-डॉक्टोरल प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत


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