तमिलनाडु में मानव-पशु संघर्ष रोकने में एआई तकनीक कारगर, हाथियों से जुड़ी घटनाओं में बड़ी कमी

तमिलनाडु में मानव-पशु संघर्ष रोकने में एआई तकनीक कारगर, हाथियों से जुड़ी घटनाओं में बड़ी कमी

तमिलनाडु में मानव-पशु संघर्ष रोकने में एआई तकनीक कारगर, हाथियों से जुड़ी घटनाओं में बड़ी कमी
Modified Date: January 2, 2026 / 11:37 am IST
Published Date: January 2, 2026 11:37 am IST

चेन्नई, दो जनवरी (भाषा) तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव (जलवायु परिवर्तन एवं वन) सुप्रिया साहू ने कहा कि राज्य में मानव-पशु संघर्षों को रोकने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) ‘टूल्स’ का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है, जिससे जंगली हाथियों से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।

साहू ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि राज्य वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ रहा है।

उन्होंने कहा, “मदुक्करे में रेलवे की पटरियों पर जंगली हाथियों की आकस्मिक मौत को रोकने के लिए एआई और ‘मशीन लर्निंग’ प्रौद्योगिकी लागू की गई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में एआई और थर्मल सेंसर से लैस कैमरे लगाए गए हैं।”

 ⁠

साहू ने बताया कि इस पहल से क्षेत्र में हाथियों की मौतें लगभग शून्य के स्तर पर आ गई हैं, क्योंकि प्रणाली द्वारा तैयार स्वचालित अलर्ट वास्तविक समय में स्थानीय समुदायों, लोको पायलट (ट्रेन चालक) और वन विभाग की टीमों के साथ साझा किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का विस्तार नीलगिरि सहित अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।

हाल में 2025 का संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) पुरस्कार प्राप्त करने वाली साहू ने कहा कि राज्य एक समर्पित ‘क्लाइमेट स्टूडियो’ के माध्यम से दीर्घकालिक जलवायु मॉडल भी विकसित कर रहा है।

उन्होंने बताया, “हम जलवायु परिवर्तन के दशकीय मॉडल तैयार कर रहे हैं और आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) मद्रास, अन्ना विश्वविद्यालय, गांधी देवदासन संस्थान तथा सीईईडब्ल्यू, डब्ल्यूआरआई और आईसीएलईआई जैसे संगठनों के साथ साझेदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, हम यूएनईपी के साथ दिशानिर्देशों पर काम कर रहे हैं और शहरों में ‘कूल रूफ’ समाधान लागू कर रहे हैं।”

तटीय संरक्षण के बारे में साहू ने कहा कि राज्य सरकार विश्व बैंक के सहयोग से ‘तमिलनाडु स्ट्रेंथनिंग कोस्टल रेज़िलिएंस एंड द इकोनॉमी’ (टीएन-एचएसओआरई) परियोजना को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक-ढाल विकसित करना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तटीय समुदायों की सुरक्षा करना है।

उन्होंने कहा, “हम मन्नार की खाड़ी में नए ‘मैंग्रोव’ क्षेत्र विकसित कर रहे हैं, मौजूदा ‘मैंग्रोव’ का पुनरुद्धार कर रहे हैं और समुद्री घास को बहाल कर रहे हैं।…ये सभी पहल स्थानीय समुदायों की भागीदारी से बड़े पैमाने पर प्रकृति-आधारित समाधानों के रूप में लागू की जा रही हैं।”

साहू ने बताया कि लैंडफिल में कचरे के बोझ को कम करने के लिए घरेलू कचरे को अलग-अलग करने के प्रयास भी तेज किए गए हैं।

उन्होंने कहा, “नगर प्रशासन विभाग के साथ मिलकर स्रोत स्तर पर घरेलू कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में 70 से 75 से अधिक स्थानों पर पुराने कचरे का प्राकृतिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है।”

उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक सतत समाधान विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार कस्बों और ग्राम पंचायतों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें पुनर्चक्रणकर्ताओं से जोड़ने पर काम कर रही है।

भाषा खारी मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में