पंजाब के सरकारी विद्यालयों में एआई की पढ़ाई शुरू की जाएगी: शिक्षा मंत्री

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पंजाब के सरकारी विद्यालयों में एआई की पढ़ाई शुरू की जाएगी: शिक्षा मंत्री

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  • Publish Date - July 3, 2026 / 09:44 AM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 09:44 AM IST

लुधियाना, तीन जुलाई (भाषा) पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि अगले महीने से राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में कृत्रिम मेधा (एआई) का पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।

बैंस ने यहां ‘ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पिछले एक वर्ष से एआई पहल पर काम कर रही थी और अब इसे सरकारी विद्यालयों में लागू करने के लिए तैयार है।

इस कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षा सचिव सोनाली गिरि, कई शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान बोर्ड परीक्षाओं में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 12वीं कक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

बैंस ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र पंजाब व देश के उज्ज्वल भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें विश्वास है कि इनमें से कई छात्र आगे चलकर सिविल सेवक, चिकित्सक, वकील और अन्य पेशेवरों के रूप में देश की सेवा करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव ने परीक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों पर विद्यार्थियों से सुझाव लेने के लिए उनसे सीधे संवाद किया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्राप्त सुझावों पर भविष्य की शिक्षा नीतियां तैयार करते समय विचार किया जाएगा।

बैंस ने यह भी दावा किया कि पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और देश के शिक्षा सूचकांक में पहला स्थान हासिल किया है।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, विद्यार्थियों और सरकार के प्रयासों को दिया।

सिसोदिया ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसके शिक्षा तंत्र की गुणवत्ता पर निर्भर करती है और हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि एआई नए रोजगार के अवसर सृजित करेगी, साथ ही पारंपरिक नौकरियों के स्वरूप में भी बदलाव लाएगी, इसलिए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी कौशल हासिल करना आवश्यक है।

सिसोदिया ने मूल्यांकन प्रणाली में सुधार, नकल पर रोक लगाने और वैज्ञानिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की भी वकालत की।

भाषा जितेंद्र वैभव

वैभव