योग, आयुर्वेद को कैंसर विज्ञान में शामिल कर मरीजों की मुश्किलें कम कर रहा एआईआईए गोवा
योग, आयुर्वेद को कैंसर विज्ञान में शामिल कर मरीजों की मुश्किलें कम कर रहा एआईआईए गोवा
नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के विशेषज्ञ ‘इंटिग्रेटिव ऑनकोलॉजी’ के तहत योग और आयुर्वेद को आधुनिक ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) में शामिल कर रहे हैं, जिससे कैंसर से जूझ रहे मरीजों को इस बीमारी से उत्पन्न होने वाली रोजमर्रा की चुनौतियों से निपटने और अपने दैनिक जीवन की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार लाने में मदद मिल रही है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘इंटिग्रेटिव ऑनकोलॉजी’ का बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) नवंबर 2025 में शुरू हुआ था और तब से यह कैंसर देखभाल के लिए एक बहु-विषयक एवं रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण प्रदान करके 150 से अधिक मरीज को लाभ पहुंचा चुका है।
एआईआईए गोवा के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि ‘द इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी केयर एंड रिसर्च सेंटर’ आयुर्वेद को आधुनिक कैंसर विज्ञान के साथ जिम्मेदारीपूर्वक एकीकृत करके रोगी-केंद्रित और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा, “हम कैंसर से जूझ रहे मरीजों की गरिमा, कार्य क्षमता और समग्र स्वास्थ्य बहाल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम आयुर्वेदिक रसायन चिकित्सा, आयुर्वेदिक दवाओं, मरीज के अनुकूल आहार, जीवनशैली में जरूरी बदलाव और योग चिकित्सा सहित कई तरह की उपचार पद्धतियों के व्यापक संयोजन का सहारा ले रहे हैं।”
डॉ. प्रजापति ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार सभी रोग मूल रूप से चयापचय असंतुलन से जुड़े होते हैं और इस एकीकृत चिकित्सीय दृष्टिकोण के जरिये चयापचय क्रिया में सुधार इलाज में मददगार साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा, “इसलिए हमारा उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना ही नहीं, बल्कि मरीज की समग्र रूप से देखभाल करना भी है।”
एआईआईए गोवा की डीन (अकादमिक और प्रशासन) डॉ. सुजाता कदम के मुताबिक, ‘द इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी केयर एंड रिसर्च सेंटर’ साक्ष्य-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, “आयुर्वेद की समग्र ताकत को आधुनिक कैंसर विज्ञान और सहायक उपचार पद्धतियों के साथ मिलाकर, हम कैंसर देखभाल में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर कर रहे हैं, खास तौर पर मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के क्षेत्र में।”
एआईआईए गोवा में एकीकृत देखभाल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए चिकित्सकों ने मधुमेह से पीड़ित 44 वर्षीय महिला का उदाहरण दिया, जिसके तीन साल पहले अंडाशय के मेटास्टैटिक कैंसर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी।
चिकित्सकों के अनुसार, महिला की सर्जरी की गई, जिसके बाद उसे कीमोथेरेपी दी गई। हालांकि, उन्होंने बताया कि बाद में महिला की किडनी कैंसर की चपेट में आ गई, जिसके कारण उसकी ‘नेफ्रेक्टोमी’ (किडनी के कुछ हिस्से या पूरी किडनी को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी) करनी पड़ी और अतिरिक्त कीमोथेरेपी देनी पड़ी।
चिकित्सकों के मुताबिक, कई सर्जरी के कारण महिला की जीवन की गुणवत्ता खासी प्रभावित हुई थी और उसे अक्सर थकान, कमजोरी, अनिद्रा, वजन बढ़ने, जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याएं सताने लगी थीं।
चिकित्सकों ने बताया कि रोजमर्रा के काम निपटाने में असमर्थ हुई महिला ने अपनी बेटी की सलाह पर एआईआईए गोवा की ‘इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी’ ओपीडी में दिखाया।
महिला ने कहा, “पहले मैं रोजमर्रा के काम नहीं कर पाती थी और कुछ कदम भी मुश्किल से चल पाती थी। मुझे भूख न लगने, अनिद्रा, थकान, जोड़ों में दर्द और अवसाद जैसी समस्याएं थीं। ‘द इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी केयर एंड रिसर्च सेंटर’ में इलाज के बाद मेरी हालत में काफी सुधार हुआ है और अब मैं बहुत बेहतर महसूस कर रही हूं।”
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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