एअर इंडिया विमान हादसा: एएआईबी के हलफनामे के बाद ब्लैक बॉक्स डेटा, स्मारक की मांग

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एअर इंडिया विमान हादसा: एएआईबी के हलफनामे के बाद ब्लैक बॉक्स डेटा, स्मारक की मांग

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  • Publish Date - July 19, 2026 / 09:49 PM IST,
    Updated On - July 19, 2026 / 09:49 PM IST

अहमदाबाद, 19 जुलाई (भाषा) अहमदाबाद में पिछले साल एअर इंडिया विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिजन ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) से ब्लैक बॉक्स डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की प्रतिलिपि को सार्वजनिक करने या फिर इसे उनके वकीलों के साथ साझा करने की रविवार को मांग की।

परिजन ने केवल अंतिम जांच रिपोर्ट देने और इन जानकारियों को “गोपनीय रखने” के एजेंसी के फैसले पर सवाल भी उठाया।

लंदन के गैटविक हवाई अड्डे जाना वाला एअर इंडिया का विमान (उड़ान संख्या एआई-171) 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर भी 19 लोग मारे गए थे।

हादसे में मारे गए लोगों के परिजन के प्रतिनिधियों ने रविवार को अहमदाबाद में बैठक कर उच्चतम न्यायालय में एएआईबी की ओर से दाखिल हालिया हलफनामे पर चर्चा की। इस हलफनामे में एजेंसी ने कहा कि वह ब्लैक बॉक्स डेटा या कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की प्रतिलिपि जारी नहीं करेगी।

परिजन ने जांच प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दुर्घटनास्थल पर एक स्मारक बनाने और जांच में सिम्युलेटर परीक्षणों के महत्व को स्पष्ट करने की भी मांग की।

हादसे में अपने भाई, भतीजी और चाची को गंवाने वाले रोमिन वोहरा ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अगर अधिकारी मानते हैं कि ऐसी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, तो हादसे के तुरंत बाद कॉकपिट बातचीत के कुछ हिस्से सामने कैसे आ गए।

वोहरा ने सवाल उठाया, “अगर उनका डेटा को सार्वजनिक करने का कोई इरादा ही नहीं था, तो उन्होंने हादसे के कुछ दिनों बाद ही प्रारंभिक रिपोर्ट के हिस्से के रूप में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की प्रतिलिपि क्यों जारी की?”

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार यह जानना चाहते हैं कि क्या चुनिंदा जानकारी जारी करने का उद्देश्य “दोष पायलट पर मढ़ना या पीड़ित परिवारों को गुमराह करना” है।

वोहरा ने कहा कि परिवार चाहते हैं कि ब्लैक बॉक्स का मूल डेटा या तो सार्वजनिक किया जाए, या पीड़ित परिवारों को सौंपा जाए या फिर उनका प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों के साथ साझा किया जाए।

उन्होंने कहा, “अगर वे हमें केवल संक्षिप्त रिपोर्ट देते हैं, तो हमें कैसे भरोसा होगा कि वह सही है? जब तक वास्तविक ब्लैक बॉक्स डेटा जारी नहीं किया जाता, तब तक कोई भी हमें पक्के तौर पर यह आश्वासन नहीं दे सकता कि रिपोर्ट सही है या गलत।”

वोहरा ने कहा कि पीड़ित परिवारों ने अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की है और वे अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनके वकील ब्लैक बॉक्स डेटा हासिल करने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि परिवार ब्लैक बॉक्स डेटा हासिल करने के अपने प्रयास जारी रखेंगे।

वोहरा ने कहा कि उक्त डेटा को रोके रखने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है, क्योंकि इससे पहले कई विमान हादसों की जांच में इसी तरह की जानकारी सार्वजनिक की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि अगर एएआईबी के हलफनामे में बताई गई समयसीमा के भीतर रिपोर्ट जारी नहीं की गई, तो पीड़ित परिवार अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद विरोध-प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे।

एएआईबी ने इस हफ्ते की शुरुआत में उच्चतम न्यायालय को बताया था कि विमान हादसे की जांच की अंतिम मसौदा रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप