फेफड़ों ही नहीं, मस्तिष्क और हृदय को भी प्रभावित करता है वायु प्रदूषण: चिकित्सकों ने कहा |

फेफड़ों ही नहीं, मस्तिष्क और हृदय को भी प्रभावित करता है वायु प्रदूषण: चिकित्सकों ने कहा

फेफड़ों ही नहीं, मस्तिष्क और हृदय को भी प्रभावित करता है वायु प्रदूषण: चिकित्सकों ने कहा

:   November 5, 2023 / 05:38 PM IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) दिल्ली में हवा के गंभीर रूप से प्रभावित होने के बीच शहर के चिकित्सकों ने लोगों को आगाह किया है कि वायु प्रदूषण न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि सभी आयु समूह के लोगों के हृदय और मस्तिष्क जैसे अन्य प्रमुख अंगों को भी प्रभावित करता है।

सफदरजंग अस्पताल में श्वसन रोग संबंधी औषधि विभाग के प्रमुख डॉ. नीरज गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वायु प्रदूषण के चलते विशेषकर बुजुर्गों, स्कूल जाने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं जैसी संवेदनशील आबादी में सिरदर्द, चिंता, चिड़चिड़ापन, भ्रम और संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘तंत्रिका संबंधी संज्ञानात्मक क्षमता का सीधा संबंध हवा में बढ़ते नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड से है क्योंकि वे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं।’’

डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि इसलिए ‘गैस चैंबर’ तकनीकी रूप से एक सही शब्द है जिसका इस्तेमाल हानिकारक गैसों की सांद्रता में वृद्धि के संदर्भ में किया जाता है, न केवल कणीय पदार्थ के संबंध में।

गुप्ता ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना में स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का उनकी गणितीय क्षमताओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए एकमात्र रास्ता इस जहरीली हवा के संपर्क में आने से बचना है, विशेष रूप से संवेदनशील आबादी और अस्थमा, ‘क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ (सीओपीडी) और रक्त के प्रवाह में कमी संबंधी हृदय रोग जैसी पहले से मौजूद स्थितियों वाले रोगियों को घर के अंदर रहने की कोशिश करनी चाहिए तथा निवारक उपाय करने चाहिए।

रविवार को लगातार छठे दिन दिल्ली में जहरीली धुंध छाई रही। प्रतिकूल वायु स्थिति, विशेष रूप से रात के दौरान शांत हवाओं के कारण प्रदूषण का स्तर एक बार फिर ‘‘अति गंभीर-गंभीर’’ श्रेणी में पहुंच गया।

दिल्ली में एक्यूआई शनिवार शाम चार बजे के 415 के मुकाबले और खराब होकर रविवार सुबह सात बजे 460 हो गया।

डॉक्टरों ने कहा कि शहर के अस्पतालों में पिछले कुछ दिनों से श्वसन संबंधी जटिलताओं से पीड़ित रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कई अध्ययनों में वायु प्रदूषण को मस्तिष्काघात, मनोभ्रम और संज्ञानात्मक हृास के बढ़ते खतरों से जोड़ा गया है।

गुलेरिया वर्तमान में मेदांता अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा, श्वसन और निद्रा औषधि विभाग के अध्यक्ष हैं।

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए ठोस कार्रवाई करने की तत्काल आवश्यकता है।

गुलेरिया ने कहा कि हर बार सर्दियों में हवा की गुणवत्ता खराब स्तर तक गिर जाती है और इस पर बहुत चर्चा होती है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है।

उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक खांसी, सांस लेने में कठिनाई, गले में संक्रमण और सीने में जकड़न के साथ-साथ मरीज चिंता, भ्रम और बढ़ते चिड़चिड़ापन की शिकायत कर रहे हैं। यह वायु प्रदूषण एक बड़ा संकट है जिसे तत्काल अंकुश लगाए जाने की जरूरत है।’

भाषा नेत्रपाल प्रशांत

प्रशांत

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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